रांचीः नामकुम सीओ ऑफिस में गुरूवार को हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ। खिजरी से कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप रांची स्मार्ट सिटी के लिए हो रहे जमीन म्यूटेशन के खिलाफ है। राजेश कच्छप सीओ ऑफिस पहुंचे और नामकुम सीओ से पूछा किसके आदेश पर जमीन का म्यूटेशन हो रहा है।
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रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड ने नामकुम सीओ के पास 618 एकड़ भूमि के म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया है। हालांकि अभी तक म्यूटेशन नहीं हो सका है। खिजरी विधायक राजेश कच्छप रांची स्मार्ट सिटी म्यूटेशन के खिलाफ हैं। गुरूवार को जब उन्होने नामकुम सीओ से म्यूटेशन को लेकर पूछा तो सीओ ने कहा कि मुख्य सचिव ने म्यूटेशन का आदेश दिया है। उन्होने आदेश की कॉपी दिखायी। उस आदेश की कॉपी को विधायक राजेश कच्छप ने सीओ कमल किशोर सिंह पर फेंक दिया। उन्होने कहा कि किसी भी हालत में म्यूटेशन नहीं करने दिया जायेगा।
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विधायक ने बातचीत में कहा कि रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन बिना रजिस्ट्री के ही म्यूटेशन करा रहा है। एचइसी की जमीन का अधिग्रहण एचइसी ने नहीं, बल्कि तत्कालीन बिहार सरकार ने किया था। भूमि अधिग्रहण कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि जिस कारखाने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है , यदि भूमि का इस्तेमाल नहीं होता है, तो वह भूमि उसी रैयत को वापस करनी है। यहां ठीक इसके उलट हो रहा है। एचइसी ने अपनी अतिरिक्त जमीन रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोशन को बेच दी। क्या एचइसी को यह अधिकार है।
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विधायक ने कहा कि अधिकारी अच्छी तरह से जानते हैं कि जमीन का म्यूटेशन नहीं हो सकता। इसके बावजूद सरकार की बड़ी राशि रांची स्मार्ट सिटी को बनाने में खर्च की गयी, जबकि एचइसी के पास रैयत के अलावा अन्य किसी को भूमि हस्तांतरण का अधिकार ही नहीं है। टाइटल किसके नाम से है, यह रांची स्मार्ट सिटी से पूछा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट आदेश है कि किसी भी थर्ड पार्टी को कारखाना के लिए अधिगृहित भूमि नहीं दी जा सकती। इस पर सिर्फ रैयतों का ही अधिकार होगा।
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राजेश कच्छप ने कहा कि रैयत दर-दर भटक रहे हैं और इधर स्मार्ट सिटी उनकी ही भूमि पर बन रहा है। आखिर किसने अनुमति दी बनाने की। स्मार्ट विलेज क्यों नहीं बना। उन्होने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी का स्पष्ट निर्देश है कि गरीब-गुरबों की आवाज बनती है। मै तो बस गरीबों की आवाज उठा रहा हूं। स्मार्ट सिटी का विरोध वह जारी रखेंगे, जब तक कि रैयतो को भूमि वापस नहीं मिलती व म्यूटेशन का विरोध करेंगे।




