2 लाख की कंपनी बनाई और हड़प ली 103 एकड़ जमीन, झारखंड के जमीन घोटाले की पूरी कहानी

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Live Dainik

July 18, 2025

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झारखंड के बोकारो में वन और राजस्व विभाग की 103 एकड़ भूमि को फर्जी तरीके से हड़पने के लिए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई गई। वह भी करोड़ों की इस जमीन को खरीदने के लिए कंपनी का कैपिटल महज दो लाख था। सीआईडी की जांच में जमीन खरीद की पूरी साजिश का खुलासा हुआ है।

जांच में यह बात सामने आयी है कि जमीन की खरीद उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड ने की थी। एक फरवरी 2021 को कंपनी स्थापना के दौरान इसका कैपिटल दो लाख बताया गया। लेकिन, मार्च में कंपनी ने राजवीर कंस्ट्रक्शन से आठ फरवरी 2021 को 1.80 करोड़ व 10 फरवरी 2021 को 1.20 करोड़, चार व 26 मार्च को 40 लाख की आमद के बाद जमीन की रजिस्ट्री करायी।

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सरकारी फीस देने में इसी रकम का इस्तेमाल किया गया। अब पूरे मामले में सीआईडी पावर ऑफ अटार्नी के जरिए जमीन की रजिस्ट्री करने वाले शैलेश कुमार सिंह की तलाश कर रही है। उमायुष कंपनी में शैलेश की पत्नी भी निदेशक है। वहीं, ललन सिंह नाम के व्यक्ति के नाम पर जमीन का केवाला किया गया था।

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कैसे दिया गया फर्जीवाड़े को अंजाम

बोकारो के तेतुलिया गांव में प्लॉट संख्या 426, 450, 479, 483, 554 में स्थित 95.6 एकड़ क्षेत्रफल अधिसूचित संरक्षित वन है और यह अन्य 10 गांवों की वन भूमि के साथ वर्ष 1962 में हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड (वर्तमान में बोकारो स्टील लिमिटेड) को हस्तांतरित कर दी गई थी।• सीएस खतियान 1908 के अनुसार भूमि गैर आबाद मलिक और किस्म जंगल साल के रूप में दर्ज है।

बीएसएल ने 1962 में तेतुलिया गांव में उक्त वन भूमि को वन विभाग को यह कहते हुए वापस करना चाहा कि यह उनके सीमांकन के बाहर है, लेकिन सरकारी मंजूरी के अभाव में ऐसा नहीं किया जा सका। भूमि बीएसएल के पास ही रही।

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बीएसएल अधिकारियों की मिलीभगत से कुछ लोगों ने वर्ष 2012 में हिब्बानामा के आधार पर वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर मालिकाना हक का दावा किया। कहा कि उनके पूर्वजों ने इसे वर्ष 1933 में सर्टिफिकेट केस संख्या में शामिल भूमि की नीलामी में खरीदी थी।

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फिर सीओ, चास को पुरुलिया के रजिस्ट्रार द्वारा कथित रूप से जारी की गई नीलामी कार्यवाही सह बिक्री विलेख की प्रमाणित प्रति उनके नाम पर जमाबंदी खोलने के अनुरोध के साथ पेश की। वर्ष 2013 में 103 एकड़ क्षेत्र के लिए उनके नाम पर जमाबंदी खोलने में सफल रहे। इसमें प्लॉट संख्या में 85.75 एकड़ अधिसूचित वन और 17.25 एकड़ अन्य सरकारी भूमि शामिल थी।

जानिए कैसे हुआ पूरा खेल

बोकारो निवासी इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन ने संबंधित भूमि के लिए शैलेश सिंह को पावर ऑफ अटॉर्नी दी। इसके जरिए 74.38 एकड़ जमीन उमायुष को बेच दी गई। इस कंपनी में शैलेश के परिवार के अन्य सदस्य एवं निकटवर्ती सहयोगी पदाधिकारी हैं। सीआईडी ने जांच में पाया है कि खुद पावर ऑफ अटार्नी लेकर इस जमीन को अपनी ही पत्नी व रिश्तेदारों को बेचा गया, जो पारदर्शी नहीं है। इसी तरह कुछ और जमीन अन्य लोगों को बेची गई। पूरी जमीन की बिक्री पर वन विभाग अनभिज्ञ था।

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पहली बार वर्ष 2021 में विभाग को पता चला जब डीएफओ बोकारो के खिलाफ इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन के आरोपों के साथ अवमानना का मामला दायर किया गया। लेकिन तेतुलिया गांव में वन भूमि निजी पार्टियों के बीच बिक्री-खरीद और पंजीकरण के अधीन थी। ऐसे में उच्च न्यायालय नोटिस को वापस ले लिया और अवमानना खारिज हो गई।

इसके बाद वन विभाग ने पुरुलिया के जिला रजिस्ट्रार के साथ पत्राचार किया और पता चला कि कथित बिक्री विलेख संख्या 191/1933 जिला रजिस्ट्रार और जिला मजिस्ट्रेट, पुरुलिया के कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। तब खुलासा हुआ कि बिक्री से जुड़े दस्तावेज फर्जी हैं और डीएफओ बोकारो ने एफआईआर दर्ज कराई। सीआईडी अभी एफआईआर की जांच कर रही है और टाइटल सूट भी लंबित है।

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