वाराणसीः पद्मविभूषण से अलंकृत विख्यात उपशास्त्रीय गायक पं. छन्नूलाल मिश्र का निधन हो गया है। गुरुवार भोर करीब साढ़े चार बजे उन्होंने मिर्जापुर में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार काशी में किया जाना है। उनका पार्थिव शरीर बनारस लाने की तैयारी की जा रही है। उनकी छोटी पुत्री डॉ. नम्रता मिश्रा के अनुसार बुधवार देर रात पण्डित जी की तबीयत अचानक फिर से बिगड़ गई थी। उन्हें आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया। जहां भोर में करीब साढ़े चार बाजे चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पं. छन्नूलाल मिश्र के एकमात्र पुत्र तबला वादक पं. रामकुमार मिश्र भी दिल्ली से बनारस के लिए रवाना हो चुके हैं। तत्काल विमान में टिकट नहीं मिलने के कारण वह सड़क मार्ग से ही रवाना हो चुके हैं। उनके आज शाम चार बजे तक बनारस पहुंचने की संभावना है।
आजमगढ़ में हुआ था जन्म
आजमगढ़ में जन्मे पं. छन्नूलाल मिश्र ने बनारस घराने और किराना घराना की गायिकी के प्रमुख प्रतिनिधि थे। वर्ष 2000 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया गया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह वाराणसी संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक थे। तीन वर्षों से वह मिर्जापुर में महंत शिवाला स्थित अपनी बेटी डॉ. नम्रता मिश्र के आवास पर रह रहे थे।
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11 सितंबर को बिगड़ी थी हालत
गत 11 सितंबर को पं.छन्नूलाल मिश्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उपशास्त्रीय गायन में गिरिजा देवी की श्रेणी के अंतिम गायक पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर के महंत शिवाला क्षेत्र स्थित आवास पर ही मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उपका परीक्षण और उपचार आरंभ कर दिया था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार सिंह अपनी 15 सदस्यीय टीम के साथ उनके आवास पर पहुंचे थे। उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंकज पांडेय, डॉ. सचिन किशोर और डॉ. दुर्गेश सिंह भी शामिल रहे। चिकित्सक दल ने खून की कुछ जांच तत्काल की थी। अन्य जांचों के लिए खून और मूत्र के नमूने लिए गए। शुगर लेवल बढ़ने से उन्हें कई दिक्कतें एक साथ हो गई थीं। हीमाग्लोबीन भी चिंताजनक रूप से कम था।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने सुनाया था भजन
चिकित्सकीय उपचार करने के साथ ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने पं. छन्नूलाल मिश्र का मनोवैज्ञानिक उपचार भी किया। उन्होंने पं.छन्नूलाल मिश्र को राम भजन ‘सीताराम-सीताराम-सीताराम कहिए, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए’ गाकर सुनाया था। सरस्वती पुत्र को उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा भी भेंट की थी। 12 सितंबर को मिर्जापुर के ही रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था।
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चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें एक यूनिट खून भी चढ़ाया गया था। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास कामले के नेतृत्व में डाक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद बताया था कि हीमोग्लोबीन का स्तर सुधारने के लिए एक यूनिट और ब्लड चढ़ाया गया। तब शरीर में हीमोग्लोबिन 7.6 ही रह गया था। इसके कारण उनके पूरे बदन में बहुत अधिक दर्द की शिकायत हो गई थी। शरीर में सोडियम भी बढ़ा था।
बीएचयू कर दिया गया था रेफर
उनकी सेहत में सुधार न होने पर मिर्जापुर के चिकित्सकों ने पं. छन्नूलाल मिश्र को बीएचयू के सर सुंदरलाल चिकित्सालय रेफर कर दिया था। वहां के चिकित्सकों ने हृदयाघात की आशंका जताई थी। सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती उपशास्त्रीय गायक पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र की ईसीजी, टू-डी ईको सहित अन्य जांच की। उनमें हृदयाघात के संकेत नहीं मिले थे। इसके बाद उन्हें इमरजेंसी से मेडिसिन विभाग की आईसीयू में लाया गया। वह एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (फेफड़े में गंभीर सूजन) से भी ग्रसित हो गए थे। उन्हें नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर सहित कई परेशानियां
साथ ही एंटीबायोटिक थेरेपी, इंसुलिन और अन्य सहायक उपचार भी दिए जा रहे थे। उनको टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और बीपीएच (बढ़ा हुआ प्रोस्टेट) की भी समस्या हो गई थी। पिछले सात माह से अस्वस्थ होने से उनकी पीठ में घाव (बेड सोर) बनने से सेप्टीसीमिया (खून का संक्रमण) भी हो गया है। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, महापौर अशोक तिवारी, चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह,आयुष, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ सहित कई लोगों ने अस्पताल पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना था। लगातार उपचार के दौरान सुधार न होता देख 15 सितंबर को बीएचयू के चिकित्सकों ने उन्हें घर ले जाने की सलाह दी थी।
इच्छा के अनुरूप नहीं रखा वेंटिलेटर पर
साथ ही पंडितजी नहीं चाहते थे कि किसी भी हालत में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा जाए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिजनों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे। सहमति पत्र पर पं.छन्नूलाल मिश्र की दोनों पुत्रियों ममता मिश्रा, डॉ. नम्रता मिश्रा तथा पुत्र पं. रामकुमार मिश्र की तरफ से उनके पुत्र राहुल मिश्र हस्ताक्षर किए थे। 17 सितंबर को पंडितजी की सेहत में मामूली सुधार की शुरुआत हुई थी। उनके स्वास्थ्य में सुधार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ दिन और अस्पताल में रखने का निर्णय किया था। संज्ञान लौटते ही उन्होंने अपने पौत्र राहुल का नाम लिया।
गत 26 सितंबर को बीएचयू के चिकित्सकों ने पं. छन्नूलाल मिश्र को अस्पताल से छुट्टी दे दी थी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में 13 दिनों तक उनका उपचार किया गया। उनकी पुत्री डॉ. नम्रता मिश्रा उन्हें एंबुलेंस से लेकर मिर्जापुर रवाना हो गईं थीं।
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