रांची: मैनहर्ट घोटाला का जिन्न एक बार फिर बाहर आया है। गुरूवार को निर्दलीय विधायक सरयू राय ने रांची के डोरंडा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस घोटाले में ढ़ाई साल बाद भी एसीबी द्वारा जांच रिपोर्ट पेश नहीं किये जाने के बाद 26 जून 2024 को हाईकोर्ट ने सरयू राय की रिट याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सरयू राय को निर्देश दिया था कि वह किसी पुलिस थाने में इस मामले प्राथमिकी दर्ज कराये या किसी सक्षम न्यायालय में जाकर केस दर्ज करें।
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क्या था मामला
झारखंड राज्य के गठन के बाद हाईकोर्ट ने 2003 में अहम आदेश देकर राजधानी रांची में सिवरेज-ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने के लिए कहा था। इसके बाद तत्कालीन नगर विकास मंत्री बच्चा सिंह के आदेश पर परामर्शी बहाल करने के लिए टेंडर निकाल कर दो परामर्शी का चयन किया। इसी बीच सरकार बदल गई और 2005 में अर्जुन मुंडा की सरकार में नगर विकास मंत्री रहे रघुवर दास ने डीपीआर फाइनल करने के लिए 31 अगस्त को बैठक बुलाई। बैठक में फैसला हुआ कि पहले से चयनित परामर्शी को हटा दिया जाए। बाद में ये मामला हाईकोर्ट में चला गया। आरापों के अनुसार इसपर 21 करोड़ रूपये खर्च हुए लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हुआ। इसकी जांच भी कराई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रांची में सीवरेज ड्रेनेज निर्माण को लेकर डीपीआर तैयार करने के मैनहर्ट को नियुक्ति किया गया। जिसमें बड़ पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगा। सरयू राय ने इस मामले को विधानसभा में उठाया जिसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर एसीबी ने दिसंबर 2020 में पीई दर्ज की, लेकिन रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर सरयू राय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस ढ़ाई साल में मैनहर्ट घोटाला में पीई में क्या क्या आया अबतक पता नहीं चला।



