पीएमश्री योजना में बड़ा खुलासा: लोहरदगा के स्कूलों में बिना सप्लाई के निकाल लिए लाखों, अब आनन-फानन पहुंचने लगा माल

lohardaga Pm Shri

livedainik.com विशेष रिपोर्ट

लोहरदगा: बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएमश्री योजना अब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई है। जिले के सभी पीएमश्री विद्यालयों में करोड़ों की अनियमितता सामने आई है। आरोप है कि बगैर किसी सामग्री की आपूर्ति के, फर्जी बिल-बाउचर के जरिए लाखों रुपये की निकासी की गई। LiveDainik की रिपोर्टिंग के बाद अब प्रशासन हरकत में आ गया है।

लोहरदगा में शिक्षा नहीं, भ्रष्टाचार की हो रही पढ़ाई! पीएमश्री योजना में करोड़ों की कैसे हुई खुली लूट? पढ़िए…

बच्चों के पैसे तक गबन कर मास्टर साहब बन रहे हैं अमीर, सौ-सौ रुपए तक जाते हैं खा, करप्शन की कहानी पढ़ हो जाएंगें दंग

🔴 क्या है मामला?

मार्च 2025 में पीएमश्री स्कूलों के लिए लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, खेल सामग्री, सेल्फी प्वाइंट, वेंडिंग मशीन, बैंड सेट आदि के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए। लेकिन अधिकांश स्कूलों में यह सामग्री कभी पहुंची ही नहीं। अब जब मामला उजागर हुआ, तो रातों-रात गुपचुप तरीके से सामान पहुंचाया जा रहा है

See also  कस्तूरबा विद्यालय के खाते से 8.70 लाख की फर्जी निकासी, गुमला में 5 जाली चेक के सहारे हुआ फर्जीवाड़ा

WhatsApp Image 2025 04 13 at 13.49.16 1

🕵️‍♂️ जांच में कौन शामिल?

डीसी डॉ. बाघमारे प्रसाद कृष्ण ने मामले की जांच का आदेश दिया है। डीडीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और एसडीओ अमित कुमार मामले की तहकीकात कर रहे हैं। शुरुआती जांच में ही बड़े घोटाले के संकेत मिले हैं

💼 ठेकेदारों की हलचल तेज

जैसे ही मामला सामने आया, ठेकेदार और सप्लायर बिल-बाउचर को दुरुस्त करने में लग गए। कोशिश की जा रही है कि रिकॉर्ड वैध दिखाया जा सके ताकि जांच से बचा जा सके।

🚸 बच्चों की गतिविधियों के नाम पर खेला गया खेल

पीएमश्री के तहत बच्चों के लिए स्वीकृत गतिविधियों के नाम पर लाखों की राशि उड़ाई गई। पर स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट क्लास या लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं ज़मीन पर दिखाई ही नहीं दीं

⚠️ सरकारी आदेशों की अनदेखी

सरकार द्वारा निर्धारित वस्तुएं जैसे – थ्री-डी सेल्फी प्वाइंट, म्यूजिक सिस्टम, ऑर्गेनिक स्वच्छता सामग्री – सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं। स्कूलों में वास्तविक सप्लाई नदारद है, लेकिन कागजों में खरीदी पूरी दिखा दी गई है।

See also  अलग झारखंड राज्य जेएमएम की वजह से नहीं, कांग्रेस ने जयपाल सिंह, शिबू सोरेन को दिया पैसा, मगर राज्य नहीं, वाजपेयी ने बनाया झारखंड-बाबूलाल मरांडी

❓ अब क्या?

प्रशासन की कार्रवाई से ठेकेदारों में खलबली है। पर बड़ा सवाल ये है कि क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी? और क्या सरकार इस भ्रष्टाचार पर मिसाल कायम कर पाएगी?

livedainik.com लगातार इस मुद्दे पर नज़र बनाए हुए है। हम आपको अपडेट देते रहेंगे कि कैसे शिक्षा में पारदर्शिता बहाल होती है — और क्या सच में दोषी सलाखों के पीछे जाएंगे या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now