रांचीः झारखंड हाईकोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस आर मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद अवमानना का नोटिस जारी किया। इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
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हाईकोर्ट की एकलपीठ में गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी और जज के बीच एक मामले में तीखी नोक- झोक हुई थी। अधिवक्ता ने जो बातें कहीं उसे न्यायिक गरिमा के अनुकूल बताया गया। हाईकोर्ट में होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग का यह वीडियो गुरुवार को वायरल हो गया था। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई विशेष तौर पर निर्धारित की गयी और पांच जजों के बेंच का गठन किया गया।
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सुनवाई के दौरान संविधान पीठ ने अधिवक्ता से उक्त घटना पर उनका पक्ष जानना चाहा। जिस पर अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने पूरे होश में उक्त बातें कही है। इसका उन्हें कोई पछतावा भी नहीं है। इसके बाद पूर्णपीठ ने आपराधिक मामला का नोटिस जारी करते हुए अधिवक्ता को तीन सप्ताह में इसका जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। 16 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेश कुमार और अधिवक्ता तिवारी के बीच हुई तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उठाया गया।
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क्या है पूरा मामला?
यह पूरा घटनाक्रम 16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में सामने आया। अधिवक्ता महेश तिवारी अपने मुवक्किल के बिजली कनेक्शन को फिर से बहाल करने के लिए बहस कर रहे थे, जिसे बकाया बिलों के कारण संबंधित विभाग ने काट दिया था।सुनवाई के दौरान, श्री तिवारी ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल कनेक्शन बहाली के लिए 25,000 रुपये जमा करने को तैयार है। हालांकि, न्यायमूर्ति कुमार ने एक न्यायिक मिसाल का हवाला देते हुए कहा कि कुल बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करना आवश्यक है। अंततः, वकील द्वारा अपने मुवक्किल की ओर से 50,000 रुपये जमा करने पर सहमत होने के बाद मामला सुलझ गया।
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कैसे बढ़ा विवाद? मामला तब गरमा गया जब श्री तिवारी का केस खत्म हो गया। अदालत जैसे ही अगले मामले की सुनवाई के लिए आगे बढ़ी, न्यायमूर्ति कुमार ने कथित तौर पर श्री तिवारी द्वारा बहस करने के तरीके पर कुछ टिप्पणी की। इसके बाद जज ने अदालत में मौजूद झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष को इस मुद्दे का संज्ञान लेने के लिए कहा।
न्यायाधीश की टिप्पणियों के जवाब में, श्री तिवारी बेंच के पास पहुंचे और जोर देकर कहा कि वह “अपने तरीके से बहस करेंगे।” उन्हें न्यायाधीश से यह भी कहते सुना गया, “सीमा पार न करें।” इस पूरी बहस को रिकॉर्ड कर लिया गया और इसका वीडियो बाद में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल हो गया, जिसने काफी ध्यान आकर्षित किया। इसी के चलते हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया, जिसके कारण पूर्ण पीठ का गठन हुआ और शुक्रवार सुबह सुनवाई हुई। पीठ ने वकील से औपचारिक जवाब मांगते हुए विशेष रूप से घटना के वायरल होने का उल्लेख किया।




