- Advertisement -
CM-Plan AddCM-Plan Add

ट्रेजरी घोटाले की जांच सुस्तः CM के आदेश के 5 दिनों बाद भी CID तक नहीं पहुंचा जांच का आदेश

ट्रेजरी घोटाले की जांच सुस्तः CM के आदेश के 5 दिनों बाद भी CID तक नहीं पहुंचा जांच का आदेश

रांचीः झारखंड में हुए ट्रेजरी घोटाले की आंच 14 जिलों तक पहुंच गई है, पर कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी है। अब तक सिर्फ चार जिलों में ही एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि 10 जिलों में पुलिस की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 6 अप्रैल को ट्रेजरी घोटाले की खबर सामने आई थी इसके बाद बोकारो और हजारीबाग में एफआईआर दर्ज हुई थी।
वित्त विभाग ने 10 अप्रैल को मामले की सीआईडी जांच की अनुशंसा की, जिस पर राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को आदेश भी जारी कर दिया, लेकिन आदेश के पांच दिनों के बाद भी केस सीआईडी तक नहीं पहुंची। वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने बोकोरो और हजारीबाग में दर्ज केस को सीआईडी को ट्रांसफर करने के लिए गृह विभाग को पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट लिखा था कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इन मामलों को सीआईडी को सौंपकर सघन एवं वृहद जांच कराई जाए, ताकि अवैध निकासी में शामिल अन्य कर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके।

See also  Vaibhav Suryavanshi ने रच दिया तूफानी इतिहास; 14 वर्ष की उम्र में 35 गेंदों पर सैंचूरी, तेजस्वी, जेडीयू ने दी बधाई

ट्रेजरी घोटाले पर हेमंत सोरेन का बड़ा बयान, कई लोगों की हो चुकी है पहचान , होगी सख्त कार्रवाई
इसके बावजूद मामला अब तक सीआईडी को रेफर नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग ने फाइल फिर से मुख्यमंत्री के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। सबसे पहले बोकारो और हजारीबाग में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद पलामू, जमशेदपुर, देवघर, रामगढ़, रांची, खूंटी, धनबाद, गोड्डा, दुमका, पाकुड़, साहिबगंज और गढ़वा में भी संदिग्ध निकासी के संकेत मिले हैं। अब तक की जांच में करीब 150 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आकलन है। अंतिम आंकड़ा ऑडिट और सीआईडी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
गिरफ्तारी के बाद भी पूछताछ नहीं, अफसरों पर भी कार्रवाई नहींः बोकारो और हजारीबाग में अकाउंटेंट और सिपाही की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन कार्रवाई की गति यहां भी धीमी है। गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ तक नहीं की गई है। बोकारो, हजारीबाग, रांची और रामगढ़ समेत जिन जिलों में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, वहां ट्रेजरी अफसर और डीडीओ अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। उन्हें हटाने या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है, और वे पहले की तरह बिल पास कर रहे हैं।
इधर, हजारों कर्मचारियों का वेतन अटकाः घोटाले के बाद वित्त विभाग ने भुगतान से पहले कड़ी जांच के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों से स्वप्रमाणित घोषणा पत्र लेने को कहा गया है, जिसमें व्यक्तिगत और बैंक संबंधी सभी विवरण देना अनिवार्य है। इसके बाद जहां नियमित अकाउंटेंट या बिल क्लर्क नहीं हैं और संविदा या प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारी काम कर रहे थे, वहां वेतन भुगतान रुक गया है। कई विभागों के हजारों कर्मचारियों को मार्च का वेतन अब तक नहीं मिला है।

See also  पलामू बस स्टेंड में देर रात चली गोली, राजा साहेब के ऑफिस के पास एक व्यक्ति की हत्या

सूचना आयुक्तों नियुक्ति फाइल राज्यपाल संतोष गंगवार ने दूसरी बार लौटाई, FIR वाले नामों पर आपत्ति
मामले की सीआईडी जांच शुरू नहीं होने पर वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि मामला बोकारो और हजारीबाग के पुलिस कर्मियों द्वारा वेतन मद में अवैध निकासी से जुड़ा है। यह पुलिस से संबंधित है। ऐसे में थाने द्वारा जांच ठीक नहीं है। इसलिए सीआईडी को जिम्मेदारी दी गई है। फाइल नहीं भेजे जाने के पीछे प्रक्रिया से जुड़ी वजह हो सकती है। देरी का सवाल नहीं है। किसी को बचाने या सबूत से छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। सभी सबूत विभागीय वेबसाइट पर हैं। अधिकारियों को निर्देश है कि सबूत सुरक्षित रहें। बाकी जिलों में संदिग्ध निकासी पर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट डीसी से मांगी गई है। जो दोषी होंगे, उन पर सख्त कदम उठाया जाएगा। मैं खुद भी रिपोर्ट की गहन समीक्षा करूंगा। अपराध सामने आता है कि तो हर पहलू पर नजर रखनी पड़ती है। फिर भी मैं वित्त सचिव को निर्देश दूंगा कि जांच की जटिलता से किसी कर्मचारी का वेतन अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। उन्हें जल्द वेतन दे दिया जाएगा।

See also  ICSE-ISC Result 2025: 10th-12th का रिजल्ट बुधवार को होगा जारी, ऐसे कर सकते हैं चेक
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now