झारखंड के गुमला जिले के जारी प्रखंड के जरडा पंचायत के पहाड़ों की चोटी पर बसे गांव मंगरूतला में 25 से 30 परिवार निवास करते हैं।सैकड़ों की आबादी पानी की हर जरूरत के लिए एकमात्र ‘चुए पर निर्भर है।चुआं भी बढ़ती गर्मी के साथ सूखता जाता है और बरसात के दिनों में पानी लाल व दूषित हो जाता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही अबुआ आवास’ और ‘पीएम आवास’ जैसी योजनाओं का लाभ आज तक इस गांव के किसी भी परिवार को नहीं मिला है। ग्रामीण धनो खेरवाईन ने दुख जताते हुए बताया कि सड़क न होने के कारण उनके गांव में शादी के लिए रिश्ते तक नहीं आते।स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर मरीजों को खाट के सहारे 3 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक पैदल ले जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में तो पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
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ग्रामीण धनो कोरवाइन, तेजू बड़ाइक और प्रसाद खेरवार का कहना है कि पानी के लिए कई बार आवेदन दिए गए हैं, लेकिन हर बार “हो जाएगा’ कहकर टाल दिया जाता है। आज तक पानी नहीं आया है। आजादी के कई दशक बीतने और झारखंड निर्माण के 25 साल बाद भी मंगरुतला के ग्रामीण आज भी ढिबरी युग में जी रहे हैं। गांव में बिजली का पोल लगा है, लेकिन बिजली नहीं आई। ग्रामीण मोबाइल और टॉर्च चार्ज करने के लिए दूसरे गांव जाते हैं या सोलर का सहारा लेते हैं। स्कूली बच्चे सोलर से बैटरी चार्ज करके या लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते हैं। स्कूली बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती है। दिन के उजाले में तो पढ़ाई होती है, लेकिन रात के अंधेरे में पढ़ाई में दिक्कत होती है।
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ग्रामीणों के मुताबिक, जन समस्या शिविरों में भी शिकायतें की गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ग्रामीण जहां भी जन समस्या शिविर लगते हैं, वहां आवेदन लेकर जाते हैं, और सारे अधिकारी समस्या के समाधान का आश्वासन देते हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ है








