बिहार में दिगंबर जैन मुनि को जान से मारने की धमकी, कपड़ा नहीं पहनने पर बदमाशों ने किया हमला करने की कोशिश

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December 3, 2025

बिहार में दिगंबर जैन मुनि को जान से मारने की धमकी, कपड़ा नहीं पहनने पर बदमाशों ने किया हमला करने की कोशिश

डेस्कः बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दिगंबर जैन मुनि से दुर्व्यवहार और जान से मारने की धमकी का मामला सामना आया है। जिले के सरैया थाना क्षेत्र स्थित गोपीनाथपुर दोकड़ी में कुछ बदमाशों ने गाली-गलौज किया और कपड़ा पहनाने की कोशिश की। जैन मुनि द्वारा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी और वहां से फरार हो गए। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।पुलिस के अनुसार उपसर्गजयी श्रमण श्रीविशल्यसागर जी मुनिराज वैशाली में आयोजित स्वर्ण कलश और स्वर्ण ध्वज स्थापना समारोह में शामिल होने आए थे। बासोकुंड स्थित भगवान महावीर जन्मस्थली परिसर में ठहरे थे। सोमवार को विहार करते हुए वे सरैया के दोकड़ा स्थित कांटी टोला स्कूल में रात्रि विश्राम कर रहे थे।

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कपड़ा पहनने की धमकी: मंगलवार की सुबह जब दिगंबर जैन मुनि मड़वन की ओर प्रस्थान कर रहे थे तभी गोपीनाथपुर दोकड़ा के पास बाइक से पहुंचे दो युवकों ने उन्हें रोक लिया।उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी।युवकों ने दिगंबर परंपरा का अपमान करते हुए मुनिराज को वस्त्र पहनने की धमकी दी।
विरोध पर गोली मारने की धमकी: मुनिराज द्वारा इसका विरोध करने पर आरोपियों ने गोली मार देने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। धमकी मिलते ही साथ चल रहे अनुयायियों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद मुनिराज NH-722 किनारे ही मौन ध्यान में बैठ गए। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
छानबीन में जुटी पुलिस: सूचना मिलते ही सरैया थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष सुभाष मुखिया ने बताया कि आरोपी युवकों की पहचान के लिए खोजबीन जारी है, लेकिन वे फरार हैं। फिलहाल मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
जैन समुदाय में आक्रोश: इधर घटना के बाद स्थानीय लोगों और जैन समुदाय में आक्रोश है। संतों की सुरक्षा को लेकर जैनी समाज ने गंभीर चिंता जताई है। वहीं, मुनिराज अपनी निर्धारित यात्रा के अनुसार सीतामढ़ी होते हुए मिथिलापुरी की ओर प्रस्थान कर चुके हैं।

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क्यों कपड़ा नहीं पहनते दिगंबर जैन मुनि: दिगंबर जैन मुनि कपड़ा नहीं पहनते हैं। इनका मानना है कि वस्त्र विकारों को ढकने के लिए होता है। एक मुनि जिसने विकारों पर विजयी पा लिया, उसे इसकी जरूरत नहीं है। इसके साथ वस्त्रों के रख-रखाव, साफ-सफाई और उसके लिए धन संपत्ति की जरूरत होती है, लेकिन मुनि इन सभी कामनाओं का त्याग कर देते हैं।
कौन हैं दिगंबर जैन मुनि: जैन धर्म के प्रवर्तक 24वें तीर्थंकर हैं। इसमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) तथा अन्तिम तीर्थंकर भगवान वर्धमान महावीर हैं। जैन धर्म के दो समुदाय हैं। एक श्वेताम्बर जो स्वेत वस्त्र धारण करते हैं। दूसरा दिगंबर दो वस्त्र धारण नहीं करते हैं. इसके पीछे का कारण उल्लेख है।
अकाल के कारण दो गुट: माना जाता है कि उत्तर भारत में 12 वर्षों तक अकाल पड़ा था। अकाल से बचने के लिए हजारों जैन मुनि दक्षिण भारत की ओर प्रस्थान कर गए, लेकिन कुछ जैन साधु उत्तर भारत में ही रूक गए। अकाल के कारण इन साधुओं का रहन सहन नहीं हो पा रहा था।इसलिए इन्होंने अपनी सुख सुविधा को त्याग दिया। घरों से भिक्षा ग्रहण करना, वस्त्र त्यागना आदि।
12 साल बाद क्या हुआ?: 12 साल बाद जब हजारों साधु उत्तर भारत लौटे तो उन्होंने यहां रह रहे साधुओं को समझाया कि आपलोग पुन: तीर्थंकर महावीर की परंपरा को अपना लें, लेकिन साधु राजी नहीं हुए। इसी दौरान जैन धर्म के दो समुदाय हो गए। जो दक्षिण भारत से लौटे थे वे श्वेताम्बर हो गए और जो उत्तर भारत में रहे थे, वे दिगंबर हो गए। तभी से दिगंबर कपड़ा धारण नहीं करते हैं।

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