आदिवासी समाज से आने वाली रेखा तिर्की बनी टॉपर, माता-पिता करते हैं दिहाड़ी मजदूरी

आदिवासी समाज से आने वाली रेखा तिर्की बनी टॉपर, माता-पिता करते है दिहाड़ी मजदूरी

रांचीः शनिवार को झारखंड एकेडमिक काउंसिल 12वीं के कॉमर्स और साइंस का रिजल्ट निकला। कॉमर्स के टॉपरों के लिस्ट में एक नाम ने सबका ध्यान खींचा वो है रेखा तिर्की। रांची के उर्सलैन इंटर कॉलेज की छात्रा रेखा तिर्की ने इंटर कॉमर्स की परीक्षा में छठा रैंक हासिल किया है। आदिवासी समाज से आने वाली रेखा तिर्की और उसके परिवार के संघर्ष ने सबका ध्यान खींचा है।

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रिजल्ट आने के बाद उसके घर पर मीडिया का जमावड़ा लग गया। इतनी चकाचौंध उसने कभी देखी नहीं थी। पहली बार मीडिया में आने का मतलब समझ में आया जब मीडियाकर्मी फोटो और इंटरव्यू के लिए आने लगे। रेखा तिर्की के माता-पिता को बेटी के टॉपर बनने की सूचना तब मिली जब मजदूरी नहीं मिलने से निराश होकर दोनों घर लौट रहे थे तभी उनका पड़ोसी दौड़कर घर में आया और बताया कि तुम्हारी बेटी ने जैक इंटरमीडिएट कॉमर्स में झारखंड में छठा स्थान पाया है और रांची की पहली सिटी टॉपर बन गई है।

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रेखा तिर्की का परिवार गरीबी में जी रहा है। उसके पिता महादेव तिर्की के पास स्मार्टफोन नहीं था इसलिए बेटी के टॉपर बनने की जानकारी देर से मिली या यूं कहे तो दूसरे से मिली। तिर्की दंपत्ति ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बिटिया रेखा तिर्की की सफलता इस कदर, शोर मचा देगी की, उनके एक किराए के एक कमरे वाले घर पर बड़े-बड़े टीवी चैनल और अखबार के पत्रकार पहुंचेंगे और वे लोग अखबार और टीवी में सुर्खियां बनेंगे।

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जैक 12वीं कॉमर्स रिजल्ट 2025 में रेखा तिर्की ने कुल 93.6% हासिल किए हैं। रेखा ने अकाउंटेंसी में 89, बिजनेस स्टडीज में 93 , बिजनेस मैथ में 97, इंग्लिश में 93 और सीएमएस में 96 नंबर प्राप्त किए हैं। जैक कॉमर्स रिजल्ट की ऑल झारखंड रैकिंग में रेखा ने छठा स्थान हासिल किया है, जबकि इन नंबरों के साथ वह रांची सिटी टॉपर बनीं हैं।जैक कॉमर्स 2025 टॉपर रेखा तिर्की के पिता महादेव उरांव और उनकी मां सीता उरांव दिहाड़ी मजदूर हैं, जो 300 से 400 रुपये रोजाना में किसी के घर में ईट जोड़ाई, तो किसी के घर में गार्डन की सफाई, घर का प्लास्टर, छत की ढलाई जैसे काम करते हैं।

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महादेव बताते हैं कि बेटी रेखा तिर्की और बेटे कि भविष्य को देखते हुए उन्होंने पत्नी के साथ दिहाड़ी मजदूर का काम शुरू किया था। जिसके तहत दोनों पति-पत्नी लेबर कुली का काम करते हैं। वह कंधों पर ईंट ढोते हैं और हाथों में कुदाल लेकर के मिट्टी की कटाई करते है। तो उनकी पत्नी सीता उरांव सिर पर सीमेंट ढोने का काम करती हैं।उनका परिवार रांची में किराए के कमरे में रहते हैं।

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