लोहरदगाः जिले के किस्को प्रखंड के चाहु गांव में एक दिव्यांग किसान की बेबसी चर्चा का विषय बनी हुई है। 2024 में वज्रपात में उसके बैलों की मौत हो गई। खेतों में लगी फसल भी बर्बाद हो गई थी। पैसों के अभाव में बेबस किसान न बैल खरीद सका और न ही ट्रैक्टर का ही खर्चा उठा पाया था।इसके बाद किसान लीला उरांव के दोनों बेटे बैल की जगह हल और पट्टा खींचने लगे।इस संबंध में पूछे जाने पर डबडबाई आंखों के साथ दिव्यांग लीला ने बताया कि वर्ष 2024 में वज्रपात से उनके बैल मारे गए। असमय बारिश से खेती बर्बाद हो गई। स्थिति यह है कि खेत में ट्रैक्टर चलवाने और बैल खरीदने के पैसे तक नहीं बचे हैं। ऐसे में मजबूरीवश बेटों से बैल का काम लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल बैलों के मारे जाने और खेती बर्बाद होने के बाद उसने कई जगह गुहार लगाई, लेकिन उसे कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
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दिल को झकझोर देने वाली ये खबर जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर लोहरदगा के उपायुक्त डॉक्टर ताराचंद ने इसे संज्ञान में लिया। वायरल वीडियो और तथ्य को समझने लोहरदगा के उपायुक्त खुद किस्को प्रखंड के चरहू गांव पहुंचे। वहां पहुंचकर उपायुक्त ने सबसे पहले किसान लीला उरांव से मुलाकात की और जो वीडियो और खबर सामने आई उसकी सच्चाई जानी। लीला उरांव और उसके बेटों से बातचीत के बाद पता चला कि ये वीडियो उन्होने मजाक में बनाया था।

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प्रशासन की टीम जब गांव पहुंची तो पता चला कि लीला उरांव के दो बैल की मौत तो जरूर हुई थी लेकिन वज्रपात की वजह से उसकी जान नहीं गई, बल्कि बीमारी से मौत हो गई थी। लीला उरांव के परिवार के साथ उपायुक्त ने कई और किसान परिवार से मुलाकात की और कुछ जरूरतमंद किसानों को सरकारी सहायता भी दिया गया।




