रांचीः झारखंड में छत्तीसगढ़ शराब बिक्री का मॉडल अनवर ढ़बेर के कहने पर लागू किया गया था। यह मॉडल घोटाला और कमीशन वसूली के लिए सुनियोजित योजना के तहत अमल में लाया गया। इसका खुलासा ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान किया। ज्ञात हो कि अनवर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मास्टरमाइंड रहा है। इस मामले में ईडी ने कुछ लोगों के बयान भी लिये हैं, जिससे इस बात की पुष्टि हुई। गवाहों ने अपने बयान में बताया कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला के बाद दूसरे राज्यों में इस नीति को लागू करने की योजना अनवर ढेबर ने बनायी थी।
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अनवर ढेबर के इशारे पर झारखंड में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मॉडल सुनियोजित साजिश के तहत लागू किया गया। छत्तीसगढ़ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शराब घोटाले की जांच के दौरान इस बात की पुष्टि हुई है। छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट से जुड़े अभियुक्तों ने PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज कराये गये बयान में इस बात को स्वीकार किया है। छत्तीसगढ़ ईडी ने कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में (prosecution Complain) में इन तथ्यों का उल्लेख किया है।ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान मिले इन तथ्यों के मद्देनजर झारखंड सरकार से कुछ जानकारी मांगी है। लेकिन संबंधित सूचनाएं अभी ईडी को नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान यह पाया गया है कि अनवर ढेबर शराब सिंडिकेट का किंगपिन है। भारतीय दूरसंचार अधिकारी अरूणपति त्रिपाठी को ढ़ेबर के कहने पर ही छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) का प्रबंध निदेशक बनाया गया था।
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छत्तीसगढ़ के तत्कालीन उत्पाद सचिव अनिल टुटेजा और अरुणपति त्रिपाठी शराब की बिक्री और कमीशन वसूली आदि की रिपोर्टिंग अनवर ढ़ेबर को ही करते थे। ढेबर ने छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले को अंजाम देने के लिए सुनियोजित साजिश के तहत पूरा सिंडिकेट तैयार कर रखा था। इसमें शराब बनाने वाली कंपनियां, मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनियां, हॉलोग्राम बनाने वाली कंपनी के अलावा उत्पाद विभाग के बड़े और छोटे अधिकारी शामिल थे।ईडी छत्तीसगढ़ ने शराब घोटाले की जांच के दौरान अब तक 2883 करोड़ रुपये की नाजायज वसूली का अनुमान किया है। साथ ही शराब घोटाले में शामिल लोगों द्वारा अर्जित 380 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें CSMCL के प्रबंध निदेशक की 1.42 करोड़ रुपये की संपत्ति भी शामिल है।ईडी छत्तीसगढ़ ने जांच के दौरान अभियुक्तों का बयान दर्ज किया है।छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के जुड़े लोगों ने ईडी को दिये गये अपना बयान में यह स्वीकार किया है कि छत्तीसगढ़ शराब नीति के सहारे घोटाले में सफलता हासिल करने के बाद ढ़ेबर ने इस मॉडल को दूसरे राज्यों में लागू करने की योजना बनायी। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मॉडल को झारखंड में लागू करने की कोशिश हुई और सफलता भी मिली।
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जांच में यह खुलासा हुआ है कि झारखंड में छत्तीसगढ़ मॉडल को लागू करने के लिए सबसे पहले झारखंड के अधिकारियों की मदद से CSMCL के प्रबंध निदेशक अरूणपति त्रिपाठी को सलाहकार बनवाया गया। छत्तीसगढ़ मॉडल जैसा ही उत्पाद नीति बनायी गयी। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिंडिकेट के सदस्यों को झारखंड में स्थापित किया गया। इसमें छत्तीसगढ़ में मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनियों, हॉलोग्राम बनाने वाली कंपनी प्रिज्म होलोग्राफिक एंड फिल्मस सिक्यूरिटीज लिमिटेड सहित अन्य को झारखंड में भी काम दिलाया गया।
इतना ही नहीं झारखंड में देशी शराब की बिक्री प्लास्टिक के बदले शीशे की बोतल में करने की नीति लागू की गयी। ताकि झारखंड के शराब उत्पादकों को अचानक परेशानी हो और छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट में शामिल देसी शराब बनाने वाली कंपनियो को यहां स्थापित किया जा सके या झारखंड की देसी शराब बनाने वाली कंपनियों को साथ मिलाया जा सके।
जांच में यह भी पाया गया है कि अचानक प्लास्टिक के बदले शीशे की बोतल में देसी शराब बेचने की नीति लागू होने और झारखंड की कंपनियों द्वारा सिंडिकेट में शामिल होने ने इनकार करने की वजह से कुछ दिनों तक झारखंड में देशी शराब की बिक्री छत्तीसगढ़ की कंपनियों से मंगा कर की गयी। लेकिन यह फायदेमंद नहीं रहा. क्योंकि छत्तीसगढ़ से शराब की ढुलाई पर खर्च ज्यादा होता था। जांच के दौरान पाया गया कि बाद में टॉप सिक्यूरिटीज ने झारखंड की श्रीलैब नामक देसी शराब बनाने वाली कंपनी में पूंजी लगायी और देशी शराब के व्यापार पर अपना कब्जा जमाया और झारखंड के शराब निर्माताओं को कमीशन देने के लिए मजबूर किया।




