डेस्कः बिहार के लखीसराय में नीट-यूजी परीक्षा के दौरान सॉल्वर गैंग के भंडाफोड़ मामले में गिरफ्तार की गई छात्राओं में गिरिडीह जिले की पूनम कुमारी का नाम सामने आने के बाद उसके परिवार में मातम सा माहौल है। गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड की बरहमसिया पंचायत निवासी पूनम कुमारी कभी अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के कारण चर्चा में रही थीं। वर्ष 2021 में उन्होंने इंटर साइंस परीक्षा में झारखंड टॉपर बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया था।
चिकित्सक बनने का सपना लेकर उन्होंने लगातार नीट परीक्षा की तैयारी की, लेकिन वर्ष 2022 से 2025 तक चार प्रयासों में सफलता हासिल नहीं कर सकीं। बाद में उन्होंने बीएचयू में बीएससी नर्सिंग में नामांकन लेकर पढ़ाई शुरू कर दी। अब उन्हीं पर दूसरे अभ्यर्थी की जगह नीट पुनर्परीक्षा देने का आरोप लगा है, जिससे क्षेत्र में व्यापक चर्चा है।
माता-पिता बोले- पढ़ाई में थी अव्वल, सॉल्वर गैंग के चंगुल में फंस बर्बाद हो गई बेटी।बेटी को 10 वर्ष की उम्र से ही हॉस्टल में रखकर पढ़ाई करवाई। राजधनवार में हॉस्टल में रखकर मैट्रिक करवाया उसके बाद रांची के उर्सलाइन स्कूल से वर्ष 2021 में इंटर साइंस की परीक्षा में स्टेट टॉपर रही।पूनम मधुप्रिया की जगह और चंचल नंदनी राज की जगह परीक्षा दे रहीं थीं।
लखीसराय परीक्षा केंद्र में हुई पहचान, हिरासत में ली गई
बताया जाता है कि 21 जून को बिहार के लखीसराय जिले के एक परीक्षा केंद्र पर आयोजित नीट पुनर्परीक्षा के दौरान जांच में पूनम कुमारी की पहचान संदिग्ध पाई गई। सत्यापन के दौरान पता चला कि वह मूल अभ्यर्थी नहीं थीं, बल्कि किसी अन्य परीक्षार्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थीं।लखीसराय में री-नीट परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आया है। जैक बोर्ड की 12वीं स्टेट टॉपर पूनम और पलामू की चंचल कुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आर्थिक लाभ के लालच में कदम उठाने की चर्चा
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार चार बार नीट में असफल रहने के बाद पूनम ने कथित रूप से आर्थिक लाभ के लालच में यह कदम उठाया। आरोप है कि वह मूल अभ्यर्थी मधुप्रिया को परीक्षा में सफल कराने के लिए फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा देने पहुंची थीं।हालांकि पुलिस जांच पूरी होने तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि साधारण परिवार से आने वाली छात्रा ने अपने उज्ज्वल भविष्य को दांव पर लगाकर ऐसा जोखिम क्यों उठाया।
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का उपयोग
पुलिस जांच में सामने आया कि डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी आधार कार्ड तैयार किए गए थे। आरोप है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी कुछ कर्मियों की मिलीभगत से इन लोगों को प्रवेश दिलाया गया। गिरफ्तार फर्जी परीक्षार्थियों में मधेपुरा निवासी एमबीबीएस छात्र मंतोष कुमार, मुजफ्फरपुर निवासी मेडिकल छात्र विवेक कुमार, सुपौल निवासी मेडिकल छात्र हिमांशु कुमार, मधुबनी निवासी सौरभ जौझा, बीएचयू की छात्रा पूनम कुमारी, दिल्ली के मेडिकल छात्र अमन अग्रवाल, रौशन कुमार, झारखंड निवासी चंचल कुमारी तथा राजस्थान निवासी मेडिकल छात्र जितेन्द्र कुमार शामिल हैं।

फर्जी के साथ मूल परीक्षार्थी भी गिरफ्तार
पुलिस ने इन आरोपियों की निशानदेही पर मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार तथा सहयोगी अर्पित सिंह और रंजीत कुमार को भी गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दायरे में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कई कर्मी भी आए हैं। पुलिस ने बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, मयंक कश्यप, विशाल कुमार, राकेश कुमार, मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार, अमलेश कुमार, आदिति कुमारी, धनश्याम कुमार, शंकर कुमार, आर्यन कुमार और चंदन कुमार समेत कुल 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया है।




