डेस्कः पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव में मंगलवार देर रात पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कथित जाली नोट और ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, भोपतपुर निवासी सुलेमान अंसारी और इम्तियाज के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जहां से चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। देर रात तक चले इस अभियान के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
मोतिहारी में एक करोड़ के जाली नोट बरामद: सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई SDPO सदर-1 एवं सदर-2 जितेश पांडेय के नेतृत्व में की गई। अभियान में दो प्रशिक्षु डीएसपी, पांच थानों की पुलिस, जिला आसूचना इकाई (DIU) और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस टीम ने कई घंटों तक अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली और संदिग्ध सामान को अपने कब्जे में लिया।
सोने के बिस्किट और हथियार भी बरामद: पुलिस सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध फर्जी नोट, 13 लाख रुपये नकद, 38 सोने के बिस्किट (फाइन व रोल गोल्ड), हथियार, कारतूस और एक वाहन बरामद होने की सूचना है। हालांकि पुलिस ने अभी तक बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सभी बरामद सामान की जांच की जा रही है और विशेषज्ञों की मदद से नोटों और सोने की वैधता की भी पड़ताल की जाएगी।

5 हजार असली नोट दो.. 15 हजार नकली नोट लो: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के दौरान ठगी का एक बेहद सुनियोजित तरीका सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरोपी लोगों को लालच देते थे कि यदि वे 5 हजार रुपये देंगे तो बदले में 15 हजार रुपये के जाली नोट दिए जाएंगे, जो बाजार में आसानी से चल जाएंगे।
पहले असली नोट देकर जीतते थे भरोसा: लोगों का भरोसा जीतने के लिए पहली बार कथित तौर पर जाली नोट की जगह असली नोट दिए जाते थे। जब वह रकम बिना किसी परेशानी के बाजार में चल जाती थी तो पीड़ित को विश्वास हो जाता था कि गिरोह का दावा सही है। इसके बाद वही व्यक्ति अधिक रकम लेकर दोबारा उनके संपर्क में पहुंचता था।
चिल्ड्रन बैंक के नकली नोट: सूत्रों के अनुसार, दूसरी या तीसरी बार जब कोई व्यक्ति बड़ी रकम लेकर आता था तो उसे नोटों की ऐसी गड्डी दी जाती थी जिसमें ऊपर और नीचे कुछ असली नोट रखे जाते थे, जबकि बीच में ‘Children Bank’ लिखे नकली नोट भर दिए जाते थे। गड्डी की पैकिंग इतनी सटीक होती थी कि पहली नजर में पूरी रकम असली प्रतीत होती थी।
नकली पुलिस बनकर लूट: पीड़ित जब तक नोटों की गिनती या जांच करता, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके होते थे. इस तरह लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जाती थी। पूछताछ में यह भी जानकारी सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति पांच लाख रुपये या उससे अधिक की डील करने पहुंचता था तो आरोपी उसे किसी सुनसान स्थान पर बुलाते थे। वहां पहले से मौजूद गिरोह के सदस्य पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचते और छापेमारी का नाटक करते थे।
मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा: इसके बाद कथित तौर पर वे पूरी रकम जब्त करने के नाम पर छीन लेते थे। पीड़ित यह सोचकर कि असली पुलिस ने कार्रवाई की है और वह खुद भी अवैध सौदे के लिए आया था, शिकायत करने से डर जाता था। इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाकर आरोपी फरार हो जाते थे।
हथियार मिलने से बढ़ी जांच की गंभीरता: छापेमारी के दौरान हथियार और कारतूस मिलने की सूचना के बाद पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं गिरोह का संबंध किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से तो नहीं है। बरामद वाहन, मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के तार जिले के बाहर या दूसरे राज्यों तक फैले हैं या नहीं।
रातभर चला ऑपरेशन: पुलिस की कार्रवाई देर रात तक जारी रही। सूत्रों के अनुसार, अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया है। हिरासत में लिए गए चारों लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात सामने आ रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी देने से इनकार किया है।

