लोहरदगा : भगवान श्रीराम के आदर्श, हनुमान की भक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश। लोहरदगा में आयोजित रामलीला की दूसरी रात कुछ ऐसा ही भक्तिमय माहौल देखने को मिला। अग्रसेन भवन में केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित रामलीला में मंगलवार की रात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रीराम के वनवास से लेकर माता सीता की खोज और लंका दहन तक के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय और संवादों ने दर्शकों को रामकथा से जोड़ दिया। लंका दहन के दृश्य के दौरान पूरा परिसर जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा।


कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ, उपायुक्त संदीप कुमार मीना, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी समेत अन्य अतिथियों और केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद श्रीगणेश वंदना और मां सरस्वती की स्तुति के साथ रामलीला का मंचन शुरू हुआ। रामलीला के सफल आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ता सुनील अग्रवाल, समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार साहू, कार्यकारी अध्यक्ष नितेश प्रजापति, कौशिक राज मेहता महामंत्री कुणाल वर्मा, कोषाध्यक्ष बसंत साहू, सुमित राय, गोलू सिंह, राजीव रंजन, कपिल देव मिश्रा, कुलदीप कुमार, मिथलेश वर्मा, नीरज साहू, गौरव अग्रवाल, पीयूष अग्रवाल, निकुंज साहू, गुड्डू राय, निखिल गर्ग, कुशल मित्तल, अभय यादव, विक्की महतो एवं अमर प्रजापति सहित केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही। मौके पर ओम प्रकाश सिंह, अजय पंकज, देवाशीष कार, संजय बर्मन समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

त्याग और मर्यादा की सीख देता है श्रीराम का जीवन : संजय सेठ
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्शों का प्रतीक है। उनके जीवन प्रसंगों से प्रेरणा लेकर समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्शों को अपनाकर ही सशक्त समाज का निर्माण संभव है। संजय सेठ ने रामलीला के आयोजन के लिए केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति की सराहना करते हुए जिलेवासियों को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं।

कैकेयी के वरदान से वनवास तक के प्रसंगों ने किया भावुक
रामलीला में कलाकारों ने अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों से लेकर कैकेयी-मंथरा संवाद तक का प्रभावशाली मंचन किया। कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से वरदान मांगने और श्रीराम के वनवास जाने के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद केवट संवाद, चित्रकूट में भरत मिलाप, पंचवटी में माता सीता का हरण, जटायु मोक्ष, शबरी के जूठे बेर और हनुमान-सुग्रीव मिलन के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। कलाकारों के अभिनय और संवादों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।

अशोक वाटिका से लंका दहन तक दिखी हनुमान की वीरता
दूसरे दिन के मंचन का प्रमुख आकर्षण अशोक वाटिका में हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज और लंका दहन का दृश्य रहा। हनुमान जी की वीरता और भक्ति के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह भर दिया। लंका दहन के दृश्य के दौरान दर्शक जय बजरंगबली के उद्घोष करने लगे। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देर रात तक रामलीला देखने के लिए मौजूद रही।

नई पीढ़ी को राम के आदर्शों से जोड़ना उद्देश्य : रमेश साहू
केंद्रीय दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार साहू ने कहा कि रामलीला का उद्देश्य नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के चरित्र और आदर्शों से परिचित कराना है। रामकथा के प्रसंग युवाओं को कर्तव्य, त्याग, अनुशासन और मर्यादा का महत्व समझाते हैं। उन्होंने कहा कि रामलीला देखने के लिए उमड़ रही भीड़ लोहरदगा के लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव को दर्शाती है।







