रांचीः झारखंड की प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा (Jharkhand DGP Tadasha Mishra) को राज्य सरकार ने डीजी रैंक में प्रोन्नति दे दी है। पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की एैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद डीजी रैंक में एक पद रिक्त हुआ था, जो तदाशा मिश्रा को आवंटित किया गया है।
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झारखंड में डीजी रैंक में कुल चार पद हैं। तदाशा मिश्रा के डीजी रैंक प्रोन्नति के साथ ही सभी चारों पद भर दिए गए हैं। इनमें 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी डीजी रेल अनिल पाल्टा, 1992 बैच के प्रशांत सिंह, 1993 बैच के एमएस भाटिया व 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा शामिल हैं।
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अनुराग गुप्ता की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद छह नवंबर को तदाशा मिश्रा झारखंड की प्रभारी डीजीपी बनाईं गईं थीं। तब वे गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं।प्रभारी डीजीपी बनने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नत किया है। तदाशा मिश्रा की सेवानिवृत्ति तिथि अगले माह 31 दिसंबर को है।
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सीआईडी के डीआईजी बने साइबर अपराध संबंधित मामलों के नोडल अधिकारी
अब साइबर अपराध से संबंधित मामलों के लिए सीआईडी के डीआईजी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने पूर्व में ही इससे संबंधित आदेश जारी किया था।जारी आदेश के अनुसार साइबर अपराध से संबंधित मामलों के लिए सीआईडी के डीआईजी से नीचे रैंक का अधिकारी नोडल अधिकारी नहीं बन सकता है। डीआईजी या उससे ऊपर के अधिकारी ही ऐसे अपराध में बड़े निर्णय लेने के लिए योग्य होंगे।
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अमूमन साइबर अपराध के केस में टेकडाउन नोटिस के लिए नोडल अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी गैरकानूनी, मानहानि करने वाली सामग्री, आपत्तिजनक सामग्री, देश हित को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री को हटाने के लिए अधिकृत अधिकारी ही टेकडाउन नोटिस जारी कर सकता है।झारखंड में पहले एसपी स्तर के अधिकारी के पास इससे संबंधित शक्ति दी गई थी, जिसे अपग्रेड करते हुए डीआईजी को अधिकृत कर दिया गया है। अब साइबर अपराध के मामले में सीआईडी के डीआईजी अधिकृत रूप से अनुसंधानकर्ता को आवश्यक आदेश-निर्देश भी जारी कर सकते हैं।




