रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरन और उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने नए मुख्यमंत्री आवास की आधारशिला सोमवार को रखीं। मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में पूजा अर्चना कर इसकी आधारशिला रखी गई।इस आवास में कई अत्याधुनिक सुविधाएं और बैठक के लिए हाईटेक इंतजाम होंगे।

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मुख्यमंत्री के नए आवास का निर्माण भवन निर्माण विभाग द्वारा कराया जा रहा है। कुछ दिनों पहले इसके प्रथम तल को ध्वस्त किया गया था। विभाग के प्रमंडल- 01 द्वारा की गई नीलामी के बाद पुराने भवन को ध्वस्त किया गया था। नया डीपीआर बनने के बाद अब इसका निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। इस आवास को लेकर कई मिथक थे जो इसके पुनःनिर्माण की एक बड़ी वजह माना जाता है। इस आवास का नाम कैफोर्ड हाउस है, जिसे सीएम हाउस भी कहा जाता है। ऐसी मिथक प्रचलित है कि इस आवास में जो कोई मुख्यमंत्री रहा उसने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड़ आवास नंबर पांच का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अभी जहां रहते है और कैफोर्ड हाउस में सिर्फ एक दीवार की दूरी है। मुख्यमंत्री पूर्व में निर्मित इस आवास का उपयोग समय समय पर करते रहे है। विधायकों के साथ बैठक या अन्य बैठक में मुख्यमंत्री इस आवास का इस्तेमाल करते रहे है। अब इन दोनों आवास को मिलाकर एक अत्याधुनिक आवास बनाया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस आवास में हैलीपैड जैसी सुविधाएं रहेंगी। इसके अलावा बड़े बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम भी होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आवास में पार्किंग के लिए उचित व्यवस्था और गार्डन भी होगा।
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कैफोर्ड हाउस जिसका अब रूप बदलने वाला है और अब वो मुख्यमंत्री के नए आवासीय परिसर का हिस्सा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री का वर्तमान आवास के विस्तार का हिस्सा बन रहे पूर्व के कैफोर्ड हाउस को लेकर कई तरह के मिथक है जिसका जिक्र हम आगे करेंगे जिसे झारखंड में मुख्यमंत्री का आवास कहा जाता रहा है। हेमंत सोरेन जब 13 जुलाई 2013 को पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तब भी वो इस आवास में नहीं रहे थे। इसकी एक वजह ये भी रही कि उनका आवास मुख्यमंत्री आवास से सटा हुआ था, सिर्फ एक दीवार का फर्क था। 1853 में बंगाल के लेफ्टिनेंट गर्वनर के प्रिंसिपल एजेंट कमिश्नर एलियन ने इस आवास की नींव रखी थी। भवन निर्माण पूरा होने से पहले ही एलियन का ट्रांसफर हो गया। इसके बाद कैफोर्ड ने पद संभाला और उनके आने के साथ ही निर्माण कार्य तेज हो गया। 1854 में ब्रिटिश सरकार ने कमिश्न सिस्टम को इंप्लीमेंट किया और कैफोर्ड को छोटा नागपुर का कमिश्नर बना दिया। कैफोर्ड इस आवास में रहने लगे तभी से इस आवास का नाम कैफोर्ड हाउस हो गया।
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कैफार्ड हाउस को माना जाता था अशुभ
बिहार से झारखंड अलग होने के बाद अस्थायी सरकार बनने की वजह से मुख्यमंत्री के चेहरे बदलते रहे। इसी कड़ी में कैफोर्ड हाउस को अशुभ मान लिया गया। 2014 में रघुवर दास के मुख्यमंत्री बनने से पहले बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बने, लेकिन कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका।
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रघुवर दास ने पूरा किया कार्यकाल, पर..
2014 में रघुवर दास राज्य के मुख्यमंत्री बने, उन्होने मिथक तोड़ने की दूसरी कोशिश की। उन्होने कहा कि वो इन सब बातों पर यकीन नहीं करते। उन्होंने इस आवास में कुछ वास्तु बदलाव जरूर किए। उन्होंने कांके रोड वाले गेट से आने जाने की जगह मोरहाबादी वाले गेट का इस्तेमाल किया। उन्होने अपना कार्यकाल जरूर पूरा किया लेकिन, दूसरी बार वो मुख्यमंत्री नहीं बन सके।




