शराब घोटाला मामले में विजन प्लेसमेंट एजेंसी के तीनों संचालकों से ईडी ने जेल में की पूछताछ

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Jharkhand liquor scam: शराब घोटाला मामले में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी ने मंगलवार को रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद मेसर्स विजन हास्पिटालिटी सर्विसेज एंड कंस्ल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के तीनों ही आरोपितों से पूछताछ की। इन आरोपितों में परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर और महेश शिडगे शामिल हैं।

तीनों गुजरात के रहने वाले हैं। इन्हें एसीबी झारखंड की टीम ने शराब घोटाले से संबंधित एसीबी रांची के कांड संख्या 09/2025 में 14 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। एसीबी के इसी केस में ईडी ने पीएमएल अधिनियम के तहत 28 नवंबर को इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआइआर) 10/2025 दर्ज किया है।

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इसी केस के सिलसिले में पीएमएलए की विशेष अदालत से अनुमति के बाद ईडी की टीम मंगलवार को तीनों ही आरोपितों से पूछताछ करने के लिए केंद्रीय कारा होटवार पहुंची थी। आरोप है कि इस एजेंसी ने हजारीबाग, चतरा और कोडरमा में शराब दुकानों के लिए मैनपावर आपूर्ति के ठेके में फर्जी बैंक गारंटी दी थी।

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इससे झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) को 38 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। ईडी ने भी अपने इस नए ईसीआइआर में तत्कालीन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और अन्य अधिकारियों पर पद के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश के तहत नियमों को ताक पर रखकर चहेती एजेंसियों को ठेका देने का आरोप लगाया है।

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मेसर्स विजन हास्पिटालिटी (गुजरात) और मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज (महाराष्ट्र) पर फर्जी बैंक गारंटी के जरिए ठेका हासिल करने का आरोप लगा। इससे पहले झारखंड एसीबी ने 11 आरोपित आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे, संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह, पूर्व महाप्रबंधक सुधीर कुमार दास, अमित प्रकाश आदि को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

निर्धारित 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल नहीं होने से सभी को जमानत मिल गया था। विनय कुमार चौबे और उनके करीबी विनय सिंह वर्तमान में हजारीबाग के जमीन घोटाला मामले में जेल में हैं।

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