वर्तमान समय में मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च के कई मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। बच्चे कैंसर की चपेट में तेजी आ रहे हैं। प्रति दस लाख पर 72.7 लड़के और 39.9 लड़कियों में कैंसर मिला है। 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या प्रति दस लाख क्रमश: 59.6 और 23.9 रही। यानी पिछली रिपोर्ट के मुकाबले बच्चों में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है।
इसका खुलासा महामना पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल की जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री 2020-21 (पीबीसीआर) रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 0-14 साल के 2.4 फीसदी कैंसर की चपेट में हैं। बच्चों में सबसे अधिक लिम्फोइड ल्यूकेमिया (रक्त एवं अस्थि मज्जा) कैंसर है। औसतन प्रति दस लाख पर 11.9 लड़के और 7.2 लड़कियां इसकी चपेट में आई हैं। बच्चियों में रक्त कैंसर के बाद किडनी कैंसर सबसे ज्यादा है।
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बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक कैंसर के बढ़ते मामलों की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। बनारस में प्रति लाख 67.7 पुरुष और 54.7 महिलाएं कैंसर की चपेट में हैं। इसमें किसान, लिपिक वर्ग/दुकान संचालक और गृहिणीयां सबसे ज्यादा हैं। यह संख्या क्रमश: 34.9, 14.9 और 13.8 फीसदी है। बनारस में हर 13 में से एक पुरुष तथा हर 16 में से एक महिला को जीवनकाल में कैंसर होने का जोखिम है।
गांव से ज्यादा शहरों में मरीज
अस्पताल की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार बनारस में कैंसर के 4446 मरीज मिले हैं। इसमें 2514 पुरुष और 1932 महिलाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में सबसे ज्यादा मुंह, जीभ, गॉल ब्लैडर, फेफड़ा और लिवर के मरीज हैं। ये 17.8, 5.8, 4.5, 4.2 और 2.9 प्रति लाख क्रमश: हैं। वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट, गॉल ब्लैडर, सर्वाइकल, ओवरी और माउथ कैंसर ज्यादा है। ये 12.4, 7.9, 5.0, 3.9 और 2.2 है।
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रिपोर्ट के अनुसार जिले में गांवों की तुलना में शहरों में कैंसर मरीजों की संख्या कहीं अधिक है। शहरी पुरुषों में कैंसर की दर 76.5 प्रति लाख दर्ज की गई, जो ग्रामीण पुरुषों (59.3 प्रति लाख) से काफी अधिक है। इसी तरह महिलाओं में भी शहरी क्षेत्रों में कैंसर की दर 62.5 प्रति लाख है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 48.7 प्रति लाख पाई गई।
गॉल ब्लैडर कैंसर दे रहा चेतवानी
महिलाओं में पहले ब्रेस्ट और दूसरे नंबर सर्वाइकल कैंसर होता था, लेकिन अब गॉल ब्लैडर कैंसर ज्यादा हो रहा है। इसमें मृत्यु दर भी अधिक है। रिर्पोर्ट के अनुसार प्रति लाख 7.9 महिलाएं गॉल ब्लैडर कैंसर की चपेट में आ रही हैं। वहीं प्रति लाख 7.2 की मृत्यु दर है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टोन के कारण ये समस्या बढ़ रही है।
43.4 फीसदी मुंह और गले का कैंसर
रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा 43.4 मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित हैं। दूसरे नंबर पर पेट और तीसरे पर श्वसन तंत्र प्रणाली को प्रभावित करने वाला कैंसर ज्यादा है।
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कीटनाशकों के कारण किसान पीड़ित
एमपीएमएमसीसी ऐंड एचबीसीएच के प्रिवेंटिव ऑनकोलॉजी ऐंड कैंसर रजिस्ट्री की ऑफिसर इंचार्ज डॉ. दिव्या खन्ना ने कहा कि इस बार हम लोगों ने पेशे के आधार पर भी रिपोर्ट तैयार की है। किसानों और गृहिणियों में कैंसर के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं। तंबाकू सेवन, कीटनाशकों का संपर्क, धुएं और स्वास्थ्य जांच में देरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नियमित स्क्रीनिंग, तंबाकू से दूरी, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। पीबीसीआर रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कैंसर अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बन चुका है।
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पेशे के अनुसार कैंसर
किसान- 34.9
लिपिक, दुकान संचालक -14.9
गृहिणी -13.8
शासकीय कर्मचारी -9.1
सेमी स्किल्ड लेबर -5.3
सेमीप्रोफेशनल -4.5
अन स्किल्ड लेबर -4.2
निजी कर्मचारी -3.3
प्रोफेशनल -2.0
स्किल्ड लेबर -1.7
बेरोजगार -1.2




