रांचीः एयर एंबुलेंस क्रैश होने की पीछे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं । क्या मौसम विभाग की चेतावनी को नजरअंदाज कर विमान को उड़ान भरने की इजाजत दी गई । झारखंड में मौसम विभाग ने शाम को यलो अलर्ट जारी करते हुए रांची-लातेहार-गढ़वा-लोहरदगा में बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की थी बावजूद इसके विमान को उड़ान भरने की इजाजत देना सवालों के घेरे में आता है।
#WATCH चतरा:सिमरिया ब्लॉक में एयर एम्बुलेंस क्रैश पर, DC कीर्तिश्री जी ने कहा,"यह आंधी-तूफान की वजह से क्रैश हुआ..
डॉक्टरों की टीम ने उन्हें मृत पाया।कुल 7 लोग मारे गए हैं।दो क्रू मेंबर थे,और बाकी 5 एक मरीज़ और मरीज़ के परिवार के सदस्य थे..."#AirAmbulanceCrash #Ranchi #Jharkhand pic.twitter.com/iff5w9M9Br
— Live Dainik (@Live_Dainik) February 24, 2026
रांची से दिल्ली जाने वाला एयर एंबुलेंस सिमरिया में क्रैश, खराब मौसम की वजह से सर्च में परेशानी
चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?
झारखंड के इन क्षेत्रों में जारी मौसम विभाग की चेतावनी के बीच एयर एंबुलेंस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस समय हादसा हुआ, उसी दौरान IMD Ranchi की ओर से ‘Light Thunderstorm with Surface Wind (30–40 kmph)’ की WATCH चेतावनी जारी थी।
झारखंड मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया था
मौसम विभाग ने अपने बुलेटिन में स्पष्ट किया था कि अगले तीन घंटों के भीतर गरज-चमक और तेज सतही हवा चलने की प्रबल संभावना है। चेतावनी रात 8:02 बजे तक प्रभावी थी।
किस विमान का हुआ हादसा?
दुर्घटनाग्रस्त विमान Beechcraft C90 मॉडल का एयर एंबुलेंस था, जो आमतौर पर मेडिकल इमरजेंसी के लिए इस्तेमाल होता है। यह विमान IFR (Instrument Flight Rules) सक्षम माना जाता है, लेकिन थंडरस्टॉर्म के दौरान छोटे और मध्यम आकार के टर्बोप्रॉप विमानों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
Thunderstorm क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार, असली खतरा केवल 30–40 किमी प्रति घंटा की हवा नहीं, बल्कि अचानक बनने वाला microburst और wind shear होता है।एविएशन के मूल सिद्धांत के अनुसार लिफ्ट इस समीकरण पर निर्भर करती है: यदि wind shear के कारण अचानक हवा की सापेक्ष गति (V) कम हो जाए, तो लिफ्ट V² के अनुपात में गिरती है। यानी टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान थोड़ी सी स्पीड लॉस भी घातक हो सकती है।
रात में उड़ान से खतरा और बढ़ा
रात में उड़ान भरने से कई खतरे बढ़ जाते हैं। इसमें बादलों की वास्तविक ऊँचाई का आकलन मुश्किल हो जाता है । बिजली की चमक से पायलट को spatial disorientation हो जाती है । भारी बारिश से visibility शून्य के करीब पहुंच जाती है । Remote क्षेत्र में सीमित नेविगेशन सहायता मिलती है । सबसे बड़ी बात ये कि एयर एंबुलेंस उड़ानें अक्सर समय के दबाव में होती हैं, जिससे निर्णय लेने में जोखिम बढ़ सकता है।
एयर एंबुलेंस क्रैश पर उठ रहे अहम सवाल
- क्या टेकऑफ से पहले अद्यतन METAR/TAF रिपोर्ट ली गई थी?
- क्या रूट पर सक्रिय thunderstorm सेल मौजूद था?
- क्या वैकल्पिक हवाई अड्डे की योजना तैयार थी?
- क्या ATC ने मौसम की ताज़ा जानकारी दी थी?
आधिकारिक जांच का इंतजार
फिलहाल दुर्घटना की जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। जब तक FDR (Flight Data Recorder), CVR (Cockpit Voice Recorder) और रडार डेटा का विश्लेषण सामने नहीं आता, तब तक अंतिम कारण बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि — क्या जारी मौसम चेतावनी को पर्याप्त गंभीरता से लिया गया था?




