रांचीः झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस एक सीट हर कीमत पर चाहती है । कांग्रेस प्रभारी के राजू और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्रीमल्लु भट्टी विक्रमार्क ने इस सिलसिले में हेमंत सोरेन से मुलाकात की । केशव महतो कमलेश भी इस दौरान मौजूद थे ।
गौरतलब है कि झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि आवश्यक संख्या बल नहीं होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उम्मीदवार उतारने का फैसला कर मुकाबले को रोचक बना दिया है। वहीं, कांग्रेस भी गठबंधन के भीतर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटी हुई है। टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं की दिल्ली में सक्रियता बढ़ने से राज्य की राजनीति गर्मा गई है।

बिना संख्या के मैदान में बीजेपी
झारखंड से राज्यसभा चुनाव में पहली वरीयता के आधार पर जीत हासिल करने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास कुल 24 विधायक हैं, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़े से चार कम हैं। इसके बावजूद भाजपा ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई है। अंतिम निर्णय के लिए तीन नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की तैयारी है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति और गठबंधन समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
राज्यसभा टिकट के संभावित दावेदार
राज्यसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दलों में कई नाम चर्चा में हैं।
झामुमो
- अंजलि सोरेन
- मिथिलेश ठाकुर
- कुणाल सारंगी
- अमर कुमार बाउरी
- रवींद्र राय
भाजपा
- दीपक प्रकाश
- राकेश प्रसाद
- बालमुकुंद सहाय
- केशव महतो कमलेश
कांग्रेस
- सुबोधकांत सहाय
- धीरज साहू
- राजेश ठाकुर
अन्य
- परिमल नथवानी
संगठन के नेताओं पर भाजपा का भरोसा
पिछले एक दशक में भाजपा ने झारखंड से राज्यसभा भेजने के लिए संगठन से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2016 में महेश पोद्दार के राज्यसभा पहुंचने के बाद समीर उरांव, दीपक प्रकाश, आदित्य साहू और प्रदीप वर्मा जैसे संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को अवसर मिला। झारखंड गठन के बाद भाजपा के 14 नेता राज्यसभा पहुंचे हैं। इनमें एस.एस. अहलूवालिया एकमात्र ऐसे नेता रहे हैं जिन्हें दो बार राज्यसभा सदस्य बनने का अवसर मिला।
कांग्रेस में टिकट के लिए तेज हुई लॉबिंग
दूसरी ओर, कांग्रेस भी राज्यसभा सीट को लेकर पूरी ताकत झोंक रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद धीरज साहू और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेता दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित शीर्ष नेताओं से मुलाकातों का दौर जारी है। गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क को बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी है।
झामुमो की स्थिति मजबूत, नथवानी भी सक्रिय
वर्तमान विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के पास 34 विधायक हैं, जिससे उसकी स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है। पार्टी की ओर से अंजलि सोरेन, मिथिलेश ठाकुर और कुणाल सारंगी के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
उधर, झारखंड से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके परिमल नथवानी भी एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। वर्तमान में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य नथवानी ने झारखंड को अपनी प्राथमिकता बताते हुए इंडिया गठबंधन के समर्थन से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इससे राज्यसभा चुनाव के समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और गठबंधन के भीतर होने वाली बातचीत झारखंड के राज्यसभा चुनाव की दिशा तय करेगी।


