रांचीः आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े संदिग्ध आतंकी उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन ने एक युवती पर धर्म बदलने का दबाव बनाया। साथ ही आतंकी संगठन में शामिल होने को कहा था। इसका खुलासा एनआईए की ओर से दर्ज गंभीर आतंकवाद से जुड़े एक मामले में अदालत के समक्ष किया गया। इसकी जानकारी केस की जांच के दौरान मिली। एनआईए ने जानकारी दी कि इनकार करने पर युवती और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी थी।
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एनआईए के अनुसार, आरोपी उमर बहादुर और उसका सह आरोपी फैजान अंसारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिये आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने, उन्हें बरगलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने में सक्रिय थे। आरोपी फैजान अंसारी लोहरदगा जिला की मिल्लत कॉलोनी का निवासी है, जबकि उमर बहादुर उर्फ राहुल सेन रतलाम का रहने वाला है। उमर बहादुर का पहले नाम राहुल सेन था, लेकिन इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद उसने अपना नाम उमर बहादुर रख लिया था। बताते चलें कि रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 13 जनवरी को उमर बहादुर की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया ठोस सबूत मौजूद हैं। इसी के आधार पर आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गयी है।
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यूट्यूब चैनल चलाती थी पीड़ित युवतीः एनआईए की जांच में यह खुलासा हुआ कि पीड़िता एक यूट्यूब चैनल चलाती थी। इसके माध्यम से उमर बहादुर उसके संपर्क में आया था। बातचीत के दौरान आरोपी उमर बहादुर ने युवती पर धर्म बदलने और आईएसआईएस में शामिल होने का दबाव बनाना शुरु किया। जब युवती ने इसका विरोध किया और संपर्क तोड़ दिया, तो आरोपी ने अन्य फर्जी आईडी बनाकर उसे लगातार परेशान और टॉर्चर किया। युवती को विभिन्न फर्जी सोशल मीडिया एकाउंट तैयार कर प्रताड़ित किया गया। युवती को अपहरण कर हत्या करने की चेतावनी भी दी गयी। युवती ने महिला हेल्पलाइन में शिकायत भी दर्ज करायी थी। एनआईए की ओर से युवकी का बयान न्यायालय में भी कराया गया है।
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मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में उमर बहादुर की संलिप्तता का खुलासाः जांच के दौरान उमर बहादुर के कब्जे में बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री मिली थी। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के दौरान उसमें भी आईएसआईएस से जुड़े वीडियो, हथियारों के साथ तस्वीरें, कट्टरपंथी भाषण और प्रचार सामग्री मिली है। एनआईए ने अदालत को बताया कि आरोपी ने कई फर्जी नामों से सोशल मीडिया अकाउंट बनाये थे और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से भी संपर्क में था। उसने सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होने की इच्छा भी जतायी थी।




