- Advertisement -
WEB_BANNER_CM_RamNavamiWEB_BANNER_CM_RamNavami

RJD की करारी हार पर संजय यादव के खिलाफ उबाल; राबड़ी के घर में घुसे वर्कर, लालू के सामने हंगामा, हरियाणा जाओ के नारे

Lalu_Yadav_RJD_Supporters_Protest_Sanjay_Yadav

Lalu Tejashwi RJD Crisis: बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की करारी हार के बाद लालू यादव के समर्थकों का गुस्सा तेजस्वी यादव के सलाहकार और राजद के सांसद संजय यादव पर फूट पड़ा है। राजद विधायक दल की बैठक के बाद कार्यकर्ताओं ने पहले राबड़ी देवी के आवास के बाहर खूब हंगामा किया और फिर लालू यादव से मिलने के लिए आवास के अंदर घुस गए।

लालू यादव की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने अंदर भी संजय यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वीडियो में लालू समर्थकों को शांत कराने की कोशिश करते दिख रहे हैं। राजद वर्कर पार्टी की दुर्गति के लिए संजय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। संजय को लेकर दो दिन पहले रोहिणी आचार्या और तेजस्वी यादव के बीच झगड़ा हुआ था। बाद में रोहिणी ने कहा था कि संजय का नाम लेने पर उन्हें गाली दी गई और चप्पल चलाया गया।

जयचंदों को दुर्व्यवहार का परिणाम चुकाना पड़ेगा, बहन रोहिणी के दर्द पर तेजप्रताप आगबबूला

टिकट बंटवारे के दौरान भी कई नेताओं ने संजय यादव पर आरोप लगाया था कि पैसा नहीं देने के कारण उनका उनका टिकट काट दिया गया। महागठबंधन के सीट बंटवारे में भी कांग्रेस के साथ किचकिच और उसके बाद भी घटक दलों के बीच 11 सीटों पर फ्रेंडली फाइट को संभाल पाने में तेजस्वी यादव की नाकामी को भी संजय यादव से जोड़कर देखा गया।

राजद के नेता यह आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव ने पार्टी पर कब्जा जमा लिया है और संजय ना चाहें तो कोई तेजस्वी से मिल तक नहीं सकता। नीचे ये फोटो राबड़ी आवास के बाहर हंगामे और नारेबाजी के समय का है, जिसके बाद कार्यकर्ता अंदर घुस गए और लालू के सामने ही संजय यादव का विरोध किया।

तेजस्वी यादव RJD विधायक दल के नेता चुने गए, चुनाव में हार को लेकर हुई चर्चा, लालू-राबड़ी रहे बैठक में मौजूद

बिहार विधानसभा चुनाव में राजद 25 सीटों पर सिमट गई है, जबकि 2020 में उसे 75 सीटें मिली थी और वो सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई थी। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए दलों ने राजद को ऐसी धूल चटाई है कि खुद तेजस्वी राघोपुर में हारते-हारते मुश्किल से जीते हैं। तेजस्वी यादव का नेता विपक्ष का ओहदा भी बाल-बाल ही बचा है।

2 सीट और कम होती तो आरजेडी मुख्य विपक्षी दल और तेजस्वी नेता विपक्ष नहीं बन पाते। महागठबंधन की सीटें 2020 के 110 से घटकर 35 पर आ गई हैं। कांग्रेस 19 से 6, सीपीआई-एमएल 12 से 2, सीपीएम 2 से 1 और सीपीआई 2 से 0 हो गई। डिप्टी सीएम चेहरा बनाए गए मुकेश सहनी की वीआईपी का खाता नहीं खुला। आईपी गुप्ता किसी तरह अपनी सीट जीतकर आईआईपी का चुनावी खाता खोल पाए।

गुमला में दो नाबालिग सगी बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म, मामले में तीन गिरफ्तार

राजद को बिहार भर में 23 फीसदी वोट मिला, लेकिन सीट निकालने में संकट हो गया। जिन सीटों पर राजद लड़ी, वहां उसे औसतन 38.9 फीसदी वोट मिला। लड़ी गई सीटों पर बीजेपी को 48.6, जेडीयू को 46.3 और एलजेपी-आर को 43.2 परसेंट मत मिले। राज्य भर में 20 फीसदी वोट वाली बीजेपी और 19 परसेंट वाली जेडीयू की बंपर जीत का राज इसमें छिपा है। एनडीए के प्रमुख दलों में कोई भी अपनी-अपनी सीटों पर औसत 43 परसेंट से कम नहीं रहा, जबकि महागठबंधन दल अपनी सीटों पर 39 फीसदी के अंदर सिमट गए।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now