रांचीः झारखंड में 108 अधिकारी पिछले दो महीने से अपने पोस्टिंग के इंतजार में है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को लंबे समय तक वेटिंग फॉर पोस्टिंग में नहीं रखा जा सकता इसके बावजूद भी झारखंड प्रशासनिक सेवा और झारखंड पुलिस सेवा के 108 अधिकारी पिछले दो महीने से वेटिंग फॉर पोस्टिंग में हैं। यह स्थिति तब है जब 200 से अधिक पद प्रभार में है। डेढ़ लाख से अधिक पद खाली हैं। ये अधिकारी सचिवालय आकर अटेंडेंस बनाते हैं और बगैर काम के लौट जाते हैं। इन अधिकारियों में आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। पांच आईपीएस ऐसे थे जो चार महीने से पोस्टिंग की प्रतीक्षा में थे। एक सप्ताह पहले ही उनकी पोस्टिंग हुई है।
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अभी कार्मिक और गृह विभाग के अलावा कई अन्य ऐसे विभाग भी हैं, जहां राजपत्रित सेवा के अधिकारी पदस्थापन की प्रतिक्षा में है। फिलहाल राज्य प्रशासनिक सेवा के 45 और पुलिस सेवा के 63 ऐसे अधिकारी हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के डीडीसी पद से हटे एक दर्जन अधिकारी चार महीने से प्रतीक्षा में हैं। इनके अलावा राज्य प्रशासनिक सेवा के जूनियर सिलेक्शन ग्रेड के तीन दर्जन अधिकारी भी दो महीने से पोस्टिंग के इंतजार में हैं।
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गृह विभाग ने जून में अधीनस्थ सेवा के 64 अधिकारियों को राज्य पुलिस सेवा में प्रोन्निति दी, लेकिन इनमें 63 अधिकारियों की अब तक पोस्टिंग नहीं हुई है। महज एक अधिकारी की पोस्टिंग इसलिए हुई, क्योंकि वे 31 अगस्त को रिटायर हो रहे थे। पोस्टिंग न होने से अधिकारियों को प्रमोशन का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि ये लाभ पोस्टिंग की तिथि से ही देय होता है।
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नियम क्या कहता हैं
वित्त विभाग ने वेटिंग फॉर पोस्टिंग या अन्य कारणों से काम न करने की अवधि के वेतन को दिशा-निर्देश जारी कर रखा है। विभाग ने 1998 में जारी पत्र में कहा था कि बिना काम वेतन का भुगतान करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है। वर्ष 2022 में जारी संकल्प पत्र में फिर स्पष्ट किया गया कि बिना काम या सेवा के वेतन का भुगतान करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है। इस पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगनी जरूरी है। योगदान के एक सप्ताह के भीतर पोस्टिंग की कार्रवाई शुरू करे। किसी भी कीमत पर पोस्टिंग में 15 दिन से अधिक समय नहीं लगनी चाहिए। ऐसा होने पर जिम्मेदारों के वेतन से भुगतान की गई राशि कोटने का प्रावधान है। यह भी कहा गया है कि पोस्टिंग में देरी के कारणों की समीक्षा भी की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसा न हो।





