बेटे को जिंदा करने के लिए मां ने शव के साथ 7 घंटे की पूजा, पुलिस के पहुंचते ही हुआ कुछ ऐसा

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July 31, 2025

बेटे को जिंदा करने के लिए मां ने शव के साथ 7 घंटे की पूजा, पुलिस के पहुंचते ही हुआ कुछ ऐसा

डेस्कः झारखंड के चतरा में मृत बेटे को जिंदा करने के लिए मां ने 7 घंटे तक लगातार पूजा की। बेटे के शव के साथ मां चमत्कार के उम्मीद में पूजा करती रही। कुछ लोग इसी मां की ममता, कुछ अंधविश्वास कहते रहे, मां पूजा करती रही लेकिन बेटा वापस इस दुनिया में नहीं लौटा।

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दरअसल, हंटरगंज के पैनीकला गांव में बुधवार को अंधविश्वास का एक ऐसी घटना सामने आई, जिसमें एक मां अपने मृत पुत्र को जिंदा करने के लिए सुबह सात बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक प्रभु यीशु की प्रार्थना करती रही। मृतक की मां के अलावा फुआ, चाचा और गांव के अन्य महिलाएं प्रार्थना करने में उसका साथ दे रही थीं। बताया गया कि पैनी गांव के प्रदीप पासवान का पुत्र 21 वर्षीय विक्रम कुमार पासवान की मौत गुजरात के अहमदाबाद में सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद हो गयी थी।

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बुधवार को मृतक का शव सुबह सात बजे सड़क मार्ग से गांव पहुंचा। शव के आते ही उसकी मां अनिता देवी, फुआ चिंता देवी और चाचा नंदु पासवान के साथ गांव व रिश्तेदार की अन्य महिलाएं प्रभु यीशु से प्रार्थना करने लगे। मृतक की मां ने घर के किसी भी सदस्य को रोने नहीं दिया। सात घंटे तक घर में शव को रखकर उसके सामने प्रार्थना किया गया, जब मृत पुत्र जिंदा नहीं हुआ और पूरे गांव के साथ-साथ पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी तो, घर के लोग अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले गये।

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इस दौरान वशिष्ठनगर थाना प्रभारी अमित कुमार सिंह को सूचना मिली कि शव को घर में रखकर जिंदा करने के लिए झाड़-फूक किया जा रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस घर पहुंची। पुलिस की आने की खबर पर मृतक के परिजन तुरंत अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट निकल पड़े। इस बाबत मृतक की मां अनिता देवी से पूछे जाने पर बताई कि 17 जुलाई को मेरा बेटा गुजरात काम करने के लिए पैनीकला गांव से निकला था। सोमवार को उसकी अचानक तबीयत खराब हुई और मौत हो गयी।

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मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरा बेटा की मौत हुई है। अंतिम प्रयास था कि बाइबिल के सहारे प्रार्थना कर उसे पुन: जीवित करने का। लेकिन प्रार्थना भी कोई काम नहीं आई। इतना ही नही उक्त धर्म से जुड़ी कुछ महिलाएं जो बिहार के डोभी, घोड़ाघाट आदि गांव से मृतक को जिंदा करने के लिए प्रार्थना करने आई थी। सभी मिलकर प्रार्थना करते रहे, लेकिन अंत में मृतक का हिन्दू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया।

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