कौन है झारखंड का मोस्ट वांटेड प्रयाग मांझी उर्फ विवेक जिस पर है एक करोड़ का इनाम, मुठभेड़ में किस तरह हुआ अंत

कौन है झारखंड का मोस्ट वांटेड प्रयाग मांझी उर्फ विवेक जिस पर है एक करोड़ का इनाम, मुठभेड़ में किस तरह हुआ अंत

रांची:  विवेक दा उर्फ प्रयाग माँझी, उर्फ फुचना, उर्फ नागो  मांझी का अंत हो चुका है । प्रयाग मांझी उर्फ विवेक से पारसनाथ और लुगु पहाड़ थर-थर कांपता था । झारखंड पुलिस के मोस्ट वांटेड की लिस्ट के दूसरे नंबर में नागो मांझी का नाम था जिसके पहले सिर्फ एक ही नाम है और वो है  मिसिर बेसरा । बोकारो के लुगु पहाड़ी में हुए मुठभेड़ में प्रयाग मांझी उर्फ विवेक का खात्म हो गया ।  एक करोड़ के इनामी इस माओवादी नेता की मौत को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। पिछले दो दशकों से प्रयाग मांझी झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में माओवादियों का बड़ा चेहरा था।

कौन था प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा?

प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा, जिसे फुचना, नागो मांझी और करण दा जैसे कई नामों से जाना जाता था, भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था। वह संगठन के लिए रणनीतिक और सैन्य मोर्चे पर काम करता था और हाल ही में झारखंड के पारसनाथ क्षेत्र की कमान उसे सौंपी गई थी, ताकि नक्सली गतिविधियों को फिर से संगठित किया जा सके।

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कहां का था मूल निवासी?

विवेक दा धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला था, लेकिन उसकी सक्रियता का क्षेत्र सीमित नहीं था। वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैले नक्सली बेल्ट में संगठन के लिए वर्षों तक सक्रिय रहा। उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज थे।

क्यों था इतना खतरनाक?

  • रणनीतिक दिमाग: माओवादी संगठन में उसकी पहचान एक तेजतर्रार रणनीतिकार की थी।
  • हथियारों का विशेषज्ञ: उसके दस्ते के पास AK-47, इंसास राइफल और कई विस्फोटक मौजूद थे।
  • मजबूत नेटवर्क: उसके साथ सक्रिय 50 से अधिक नक्सली, जिनमें महिला माओवादी भी थीं, अलग-अलग इलाकों में फैले थे।
  • संगठन में पकड़: उसकी तूती केवल झारखंड में नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के नक्सल बेल्ट में बोलती थी।

नक्सल मुक्त होगा पारसनाथ?

पारसनाथ में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की थी। इसको लेकर पुलिस और केंद्रीय बलों ने एक बड़े अभियान की योजना बनाई थी। बोकारो के लुगू पहाड़ क्षेत्र में हुए इस एनकाउंटर में उसे मार गिराया गया। उसके साथ-साथ कई अन्य इनामी नक्सली भी ढेर किए गए हैं, जिनमें अरविंद यादव (10 लाख का इनामी) का नाम भी शामिल है।

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क्या है इसका असर?

विवेक दा की मौत से भाकपा माओवादी संगठन को एक बड़ा झटका लगा है। पारसनाथ में मजबूत होते माओवादी नेटवर्क की कमर टूट गई है। अब सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि नक्सल गतिविधियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

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