विनय चौबे की मुश्कलें बढ़ी, खास महल की जमीन मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी, ACB ने मांगी सरकार से अनुमति

निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को बड़ी राहत, ACB कोर्ट ने दी डिफॉल्ट बेल

रांचीः शराब घोटाले में रांची के बिरसा मुंडा कें्रदीय कारा में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे की मुश्कलें और बढ़ने वाली है। एसीबी ने अब हजारीबाग जिले में 2.75 एकड़ खास महल की जमीन से जुड़े एक मामले में विनय चौबे और तत्कालीन खास महल अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। इस मामले में आरंभिक जांच पूरी कर राज्य सरकार को एसीबी ने रिपोर्ट भेज दी है।

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एसीबी की ओर से तत्कालीन हजारीबाग डीसी विनय चौबे, तत्कालीन खास महल पदाधिकारी और पावर ऑफ अटॉनी के धारक विजय सिंह एवं सुधीर पर प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है। एसीबी के अधिकारियों के अनुसार मामले में शिकायत के आधार पर वर्ष 2025 में जमीन को लेकर जांच के लिए पीई दर्ज की गयी थी। शिकायत में आरोप था कि खास महल और ट्रस्ट की भूमि को अवैध तरीके से दूसरे को हस्तांतरित किया गया। तत्कालीन डीसी विनय चौबे पर आरोप है कि उन्होने आवेदन से ट्रस्ट का नाम जानबूझकर हटवाया, ताकि इसे अवैध रूप से हस्तांतरित किया जा सके। एसीबी के अधिकारियों ने यह भी जांच में पाया कि इस मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में आदेश दिया था कि ट्रस्ट की भूमि किसी अन्य को ट्रांसफर नहीं हो सकती है।

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इसके बाद भी राजस्व विभाग और तत्कालीन डीसी के आदेश पर जमीन को निजी व्यक्तियों को आवंटित किया गया। ट्रस्ट की उक्त जमीन को निजी लाभ की खातिर बेचने के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉनी का भी इस्तेमाल किया गया था। इसके लिए विजय सिंह और सुधीर कुमार के नाम पर पावर ऑफ अटॉनी तैयार की गयी थी। एसीबी ने जांच में पाया कि मामले में कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर एक साजिश के तहत उक्त काम किया गया था।

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जमीन बेचने के लिए फर्जी पावर ऑफ अटॉनी का इस्तेमालः जब एसीबी ने पिछले शुक्रवार को इस मामले की जांच पूरी की, तो यह जानकारी मिली कि उक्त भूमि 1948 के एक ट्रस्ट को 30 वर्षो के लिए लीज पर दी गयी थी। लीज की अवधि खत्म होने पर फिर से वर्ष 2008 के लिए इसे रिन्यू किया गया था। लेकिन वर्ष 2008 से 2010 के बीच साजिश के तहत उक्त भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर दिया गया और उसे 23 निजी व्यक्तियों को आवंटित कर दिया गया।

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