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ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा भूचाल: जेफ्री एप्सटीन फाइल्स खुलने के बाद पीएम कीर स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा

Morgan McSweeney

लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में उस वक्त बड़ा संकट खड़ा हो गया, जब Keir Starmer की सरकार को एक और झटका लगा। प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ Morgan McSweeney ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा कुख्यात यौन अपराधी Jeffrey Epstein से जुड़े दस्तावेजों में सामने आए नए खुलासों के बाद दिया गया है, जिसने लेबर सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

https://www.justice.gov/epstein/files/DataSet%209/EFTA00924203.pdf

एप्सटीन फाइल्स में पीटर मैंडेलसन का नाम

अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में यह सामने आया है कि Peter Mandelson, जो पहले वॉशिंगटन में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके हैं और प्रधानमंत्री स्टारमर के करीबी माने जाते थे, ने एप्सटीन से संपर्क स्वीकार करने से कहीं ज्यादा लंबे समय तक बनाए रखा। इससे पहले मैंडेलसन ने दावा किया था कि एप्सटीन से उनके संबंध सीमित और पुराने थे, लेकिन नए दस्तावेजों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस जांच के घेरे में ईमेल

मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस अब उन ईमेल्स की भी जांच कर रही है, जिनमें यह संकेत मिलता है कि 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट के बाद पीटर मैंडेलसन ने आंतरिक वित्तीय चर्चाओं से जुड़ी जानकारियां एप्सटीन को भेजी थीं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ नैतिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी गोपनीयता से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है।

स्टारमर सरकार पर बढ़ता दबाव

इन खुलासों का सीधा असर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की राजनीतिक स्थिति पर पड़ा है। मॉर्गन मैकस्वीनी को स्टारमर के सबसे भरोसेमंद और लंबे समय से साथ रहे सहयोगियों में गिना जाता था। उनके इस्तीफे को प्रधानमंत्री के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब लेबर पार्टी के भीतर ही असंतोष उभर रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई सांसद निजी तौर पर प्रधानमंत्री से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।

विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इस पूरे मामले को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की और पारदर्शिता की कमी दिखाई। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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