बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनने के अगले ही दिन बड़ा एक्शन, नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

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March 28, 2026

बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनने के अगले ही दिन बड़ा एक्शन, नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली गिरफ्तार

डेस्कः नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के अगले ही दिन बालेन शाह की सरकार ने बड़ा एक्शन लिया। नेपाल पुलिस ने शनिवार सुबह पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस नेता व पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को सितंबर 2025 में हुए जनरेशन जेड विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों से जुड़े गैर इरादतन हत्या और आपराधिक लापरवाही के मामले में गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तारी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री ओली को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

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आपको बता दें कि इसी आंदोलन ने उनके नेपाल की सत्ता से बेदखल कर दिया था। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही रैपर से नेता बने बालेन शाह ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।पुलिस के अनुसार, ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडु स्थित उनके घर से पकड़ा गया। वहीं, रमेश लेखक को सुबह करीब 5 बजे सूर्यविनायक से गिरफ्तार किया गया।यह कार्रवाई गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के आधार पर की गई है। एक जांच आयोग ने सुझाव दिया था कि इन नेताओं पर लापरवाही का केस चलाया जाए। इस मामले में 10 साल तक की सजा हो सकती है।रिपोर्ट में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है। पिछले साल हुए इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हो गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।


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गिरफ्तारी से पहले PM बालेन की अध्यक्षता में बैठक हुई
इस मामले की जांच एक आयोग ने की थी, जिसकी अगुआई पूर्व जज गौरी बहादुर कार्की ने की। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रदर्शन के दौरान हालात को संभालने में गंभीर लापरवाही हुई।रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने पहले से मिली चेतावनी (इंटेलिजेंस) के बावजूद सही कदम नहीं उठाए, जिससे हालात बिगड़ गए और कई लोगों की जान चली गई।गिरफ्तारी से पहले प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद ही पुलिस ने यह बड़ा कदम उठाया।गिरफ्तारी के दौरान काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और पुलिस की कई टीमों को तैनात किया गया।


गौरी बहादुर कार्की आयोग की प्रमुख मांगें
आयोग ने कहा कि उस समय के प्रधानमंत्री केपी ओली, गृह मंत्री रमेश लेखक और पुलिस प्रमुख के खिलाफ क्रिमिनल जांच होनी चाहिए।
आरोप है कि लगभग 4 घंटे तक गोलीबारी होती रही, लेकिन इसे रोकने के लिए समय पर कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया।
कई बड़े अफसरों (गृह सचिव, पुलिस और जांच एजेंसी के अधिकारी) पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
कुछ पुलिस अधिकारियों को चेतावनी देने और विभागीय कार्रवाई करने की मांग की गई।
9 सितंबर की आगजनी, लूटपाट की दोबारा गहराई से जांच करने को कहा गया।
जांच के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और डिजिटल सबूत इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
कुछ सेना अधिकारियों पर भी सुरक्षा में चूक के लिए कार्रवाई की सिफारिश हुई है।
जिन पुलिसकर्मियों और लोगों ने बहादुरी दिखाई, उन्हें सम्मान देने की बात भी कही गई है।
नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ था GenZ प्रदर्शन
नेपाल में 8 सितंबर को सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ GenZ का प्रदर्शन शुरू हुआ, जो हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी 'ऑफिस सिंह' दरबार को आग के हवाले कर दिया था। यहां PM ऑफिस भी था।हालात बिगड़ने पर काठमांडू समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया, संसद ठप हो गई और प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफे के बाद ओली को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया। वहीं, गुस्साए Gen- Z ने पूर्व पीएम समेत कई मंत्रियों को पीटा।

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