पलामू: मेघा श्रीराम डाल्टन मेयर पद के चुनाव के लिए मैदान में हैं । बॉलीवुड की दुनिया की छोड़ गांधी और पानी के लिए घर वापसी कर चुकी मेघा श्रीराम डाल्टनगंज या मेदिनीगर के लिए नया नाम नहीं है। शहर में बड़े-बड़े नेता अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए डेरा डाले हुए हैं । मेघा श्रीराम के साथ ना तो कोई बड़ा नाम है और ना ही कोई बड़ी पार्टी का साथ । फिर भी वो लड़ रही हैं । गली-गली बताते चलती हैं कि कोयल के किनारे बसे इस शहर को अगर बताया नहीं गया तो आने वाले दिनों में प्यास मेदिनीनगर को विरान कर देगी ।
कोक स्टूडियो से प्रसिद्ध हुई मेघा श्रीराम को अपने शहर से इतना लगाव है कि वो अपने नाम के आगे डाल्टन ही लगाती हैं । बिरसा के गीत हो या गांधी के गाने…या फिर शिव का संगीत मेघा श्रीराम के पास मुंबई जैसे शहर में बसने का पूरा हूनर है फिर वो डाल्टनगंज में ही रहती हैं । वो बताती हैं कि जिस शहर के किनारे कोयल जैसी विशाल नदी बहती हो उसका ये हाल देखा नहीं जाता ।
प्लास्टिक की बोतलों में लोग पानी मंगाते हैं..शहर में गंदगी का अंबार, पैदल चलने के लिए फुटपाथ तक नहीं, प्रदूषण से हाल बेहाल और नगर निगम में करप्शन चरम पर इन हालातों में वो मुंबई में कैसे रह सकती हैं । लिहाजा वो डॉल्टनगंज में अपने पुश्तैनी मकान में रहती हैं। मेयर का चुनाव लड़ वो दिखाना चाहती हैं कि ईमानदार लोग भी राजनीति में आते हैं…और कामयाब हो सकते हैं अगर जनता फैसला सही करे । जाति-पाति और धर्म की राजनीति से इतर मेघा श्रीराम अपने पति श्रीराम डाल्टन की तरह की चुनाव। लड़ रही हैं । जैसे श्रीराम ने चतरा लोकसभा चुनाव में हाथ में तख्ती लिए पूररा क्षेत्र पैदल ही नाप दिया वैसा ही मेघा करती हुई दिख रही हैं ।
उनका मुकाबला कांग्रेस के नेता केएन त्रिपाठी की बेटी नमिता त्रिपाठी और बीजेपी की अरुणा शंकर से है । अरुणा शंकर के पक्ष में बीजेपी के बड़े-बड़े नेता फिल्डिंग कर रहे हैं और केएन त्रिपाठी कई चुनावों में हार के बाद बेटी को मैदान में उतार विरासत की राजनीति को हवा दे रहे हैं ।
मेदिनीगर की जनता के पास कई चेहरे हैं । देखना ये है कि इन चेहरों के पीछे की राजनीति के लिए वोट करते हैं या फिर इस ऐतिहासिक शहर को प्यास, होल्डिंग टैक्स की बढ़ती दरें और गंदगी से मुक्ति के लिए मतदान ।




