तेल अवीव/काहिरा। दो वर्षों से जारी इसराइल-हमास युद्ध में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। इसराइल ने पुष्टि की है कि हमास के कब्जे में रखे गए पहले सभी जीवित 20 इसराइली बंधकों को उत्तरी गाज़ा में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस को सौंप दिया गया है। यह रिहाई अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम समझौते (ceasefire deal) के तहत हुई है, जिसे “ऐतिहासिक प्रगति” बताया जा रहा है। बदले में इजराइल ने 1900 फिलिस्तीनी बंधकों को भी रिहा कर दिय ाहै ।
गाजा में पहुंचने लगे राहत सामग्री
इस समझौते के तहत गाज़ा के अकालग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजे जाने की भी तैयारी चल रही है। इसके साथ ही इसराइल में बंद हजारों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
डोनाल्ड ट्रंप की अहम भूमिका
दो साल से चल रहे संघर्ष के समाप्त होने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना (peace plan) के पहले चरण का हिस्सा है, जिसे पिछले सप्ताह मिस्र में इसराइल और हमास के बीच परोक्ष वार्ताओं के दौरान मंजूरी दी गई थी। इन वार्ताओं में कतर और तुर्की जैसे प्रमुख देश भी मध्यस्थ रहे।
I very much welcome the release of the Israeli hostages held in Gaza.
I am profoundly relieved that they have regained their freedom & will soon be reunited with their loved ones after the immense suffering they have endured.
I reiterate my call for the release of the remains… pic.twitter.com/jKbUAkvyjY
— António Guterres (@antonioguterres) October 13, 2025
इजराइल में ट्रंप
इस बीच, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार सुबह एयर फ़ोर्स वन से इसराइल पहुंचेंगे। अपनी यात्रा के दौरान वे बंधकों के परिवारों से मुलाकात करेंगे और इसराइल की संसद (कनेस्सेट) को संबोधित करेंगे।
इसके बाद ट्रंप मिस्र रवाना होंगे, जहां वे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ एक “ग्लोबल पीस समिट” की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस सम्मेलन में युद्धविराम समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे और मध्यपूर्व में दीर्घकालिक शांति स्थापना की दिशा में नए कदमों की घोषणा होने की उम्मीद है।
राजनयिकों के अनुसार, यह समझौता न केवल गाज़ा और इसराइल के बीच तनाव को कम करेगा, बल्कि पूरे मध्यपूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है।









