रांचीः झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के गिरफ्तार 166 आरोपियों की पेशी के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पुलिस की कार्यशाली पर ही सवाल उठा दिया है। रांची सिविल कोर्ट में पेशी के लिए जब पुलिस वैन पहुंची तो पुलिस की गाड़ी के सरकारी ड्राइवर ने एक आरोपी से पैसे लेकर उसे अपना मोबाइल बात करने के लिए दिया। इसका पीडियो किसी अन्य कैमरे में कैद हो गया और फिर वायरल हो गया।हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि लाइव दैनिक नहीं करता है।
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मामले के तूल पकड़ने के बाद सिटी एसपी पारस राणा ने पुलिस का पक्ष रखते हुए इसे एक मानवीय घटना बताया।सिटी एसपी के अनुसार, वायरल वीडियो की आंतरिक जांच कराई गई है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मी (जो कोतवाली थाना का चालक बताया जा रहा है) और आरोपी एक ही गांव के रहने वाले हैं। आरोपी अपने पिता से संपर्क करने के लिए परेशान था, जिसके बाद पुलिसकर्मी ने सहानुभूति दिखाते हुए अपने मोबाइल से उसकी बात करवा दी।पुलिस का तर्क है कि यह किसी पेशेवर मिलीभगत के बजाय एक मानवीय मदद थी। वीडियो में पैसे लेते दिखने के आरोप पर भी सिटी एसपी ने सफाई दी है। उन्होंने बताया कि आरोपी के पास चार हजार रुपये थे। आरोपी ने पुलिसकर्मी को ये पैसे यह सोचकर दिए कि जेल जाने के बाद ये उसके किसी काम नहीं आएंगे, इसलिए इन्हें उसके पिता तक पहुंचा दिया जाए। हालांकि, कानूनविदों का मानना है कि किसी भी परिस्थिति में विचाराधीन कैदी को बाहरी संपर्क के लिए निजी फोन देना नियमों के विरुद्ध है।


