डेस्कः ईरान का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। ईरान में इस्लामी शासन के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन और विकराल रूप लेता जा रहा है। ईरान सरकार के निर्देश पर कई जगहों पर सुरक्षाबलों द्वारा गोलीबारी की गई है। हालात पिछले दो सप्ताह में सबसे हिंसक हो गया है। तेहरान के एक डॉक्टर ने पहचान नहीं उजागर करने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी तेहरान के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश गोलीबारी में मारे गए हैं। हालांकि टाइम मैगजीन ने इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
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मौतों का यह आंकड़ा, यदि सही है तो ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के एक भयानक दमन की ओर इशारा करता है। प्रदर्शन शुरू होने के बाद से सरकार ने देश में इंटरनेट और फोन कनेक्शन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं। ये विरोध 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जो आर्थिक संकट के खिलाफ थे, लेकिन अब ये ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं।प्रदर्शनकारी ‘आजादी’ और ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगा रहे हैं।ईरानी डॉक्टर ने टाइम मैगजीन से बातचीत में दावा किया, ‘जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चला दीं,शुक्रवार को अस्पतालों से शवों को हटाया गया। मरने वालों में ज्यादातर युवा थे. उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर मशीनगन से की गई फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए। इस घटना में कम से कम 30 लोगों को गोली लगी।’ अधिकतर रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की खबरें भी आई हैं। ईरानी प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल-रसूल मस्जिद में आग लगा दी।
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ईरान उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा: अली खामेनेई
मानवाधिकार संगठनों ने मौतों की संख्या डॉक्टर के दावे से कम बताई है। वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार अब तक कम से कम 63 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 49 नागरिक शामिल हैं। हालांकि, ईरान में मीडिया के सरकारी नियंत्रण में होने और विदेशी समाचार एजेंसियों पर कड़े प्रतिबंधों के कारण मौतों के आंकड़ों में भिन्नता बताई जा रही है। इस बीच ईरानी नेतृत्व ने सख्त संदेश दिए हैं।सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि ‘इस्लामिक रिपब्लिक उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा’।
217 लोगों की गई जान, 2 हजार से ज्यादा घायल
प्रदर्शन शुरू हुए 14 दिन से ज्यादा का समय पूरा हो चुका है। इसमें अब तक 5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं।देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 400 जगहों पर यह प्रदर्शन हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान हुईं झड़पों में अकेले तेहरान में अब तक 217 लोगों की मौत हो चुकी है। इनके साथ-साथ 14 सेना के जवान भी मारे गए हैं। पुलिस ने अब तक 2300 लोगों को हिरासत में भी लिया है।
मस्जिद और सरकारी इमारतों को किया आग के हवाले
ईरान के 20 प्रांतों में विद्रोह ही आग फैल चुकी है। 110 से ज्यादा शहरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अस्पताल में भी तोड़फोड़ के कई मामले में सामने आ चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने बीते दिन बासिज IRGC कैंप पर अटैक किया था। इसके अलावा तेहरान में 26 बैंकों में लूट को भी अंजाम दे चुके हैं। 25 मस्जिदों में आग लगाई और 10 सरकारी इमारतें खाक हो चुकी हैं। अब तक 24 अपार्टमेंट को नुकसान हुआ है।48 दमकल गाड़ी जलाईं और 42 बसें आग के हवाले कर दी हैं। कॉलेज, यूनिवर्सिटी बंद ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।
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तेजरान के मेयर ने क्या कहा?
तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने कहा कि ईरानी राजधानी में बड़े दंगों से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने ईरान के सरकारी टीवी पर कहा, “एक अस्पताल को नुकसान पहुंचा है, दो मेडिकल सेंटर और 26 बैंकों को लूटा गया है, 25 मस्जिदों में आग लगा दी गई है, और कानून लागू करने वाली चौकियों और [इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स मिलिशिया] बसीज के हेडक्वार्टर पर हमला हुआ है।” ज़कानी ने आगे कहा कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें राजधानी में हुए नुकसान की मरम्मत के लिए काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, दंगाइयों ने दस सरकारी इमारतों, 48 फायर ट्रकों, 42 बसों और एम्बुलेंस, साथ ही 24 अपार्टमेंट को नुकसान पहुंचाया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विरोध प्रदर्शन
29 दिसंबर, 2025 को, ईरानी रियाल की कीमत में भारी गिरावट के विरोध में व्यापारियों ने सेंट्रल तेहरान में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि विरोध करने वाले कारोबारी अपने साथियों से दुकानें बंद करके आंदोलन में शामिल होने की अपील कर रहे थे। 30 दिसंबर को, तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी इस अशांति में शामिल हो गए। 2 जनवरी को, मेहर ने बताया कि इलम प्रांत की सड़कों पर बंदूकों से लैस कुछ अज्ञात नकाबपोश लोग दिखाई दिए। हाल के दिनों में, प्रदर्शनकारियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच झड़पें तेज़ हो गई हैं।




