बिहार में 12 से 15 सीटों पर JMM चुनाव लड़ने की तैयारी में, जानिये किस-किस सीट पर है दावेदारी

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May 19, 2025

बिहार में 12 से 15 सीटों पर JMM चुनाव लड़ने की तैयारी में, जानिये किस-किस सीट पर है दावेदारी

रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा हेमंत सोरेन के नेतृत्व में इस बार बिहार विधानसभा का चुनाव पूरे दमखम के साथ लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय महाधिवेशन में झारखंड के बाहर और पड़ोसी राज्यों में संगठन विस्तार और गंभीरता से पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ने का संकल्प लिया गया। जेएमएम अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति को अंतिम रूप दे रही है वो चाहती है कि इंडिया गठबंधन के बैनर तले वो बिहार में चुनाव लड़े।

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वहीं दूसरी ओर अप्रैल महीने में बिहार में महागठबंधन की तीसरी बार हुई बैठक और 21 सदस्यीय समन्वय समिति में जगह नहीं मिलने से जेएमएम आहत है और उसके सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है। जेएमएम को उम्मीद है कि जिस तरह से झारखंड विधानसभा चुनाव में आरजेडी को झारखंड में सीटे दी गई, हेमंत सोरेन ने पूरे गर्मजोशी के साथ तेजस्वी यादव के साथ ताल से ताल मिलाकर 2024 को विधानसभा चुनाव लड़ा उसी तरह बिहार में आरजेडी झारखंड मुक्ति मोर्चा को बिहार में सीटे देगी और इंडिया गठबंधन में बेहतर तालमेल के साथ चुनाव लड़ने में मदद करेगी।

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लेकिन अबतक जेएमएम को बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर आरजेडी की ओर से कोई तवज्जों नहीं दिया गया है। ऐसे में संभावना इस बात की भी जताई जा रही है कि पूर्व की तरह जेएमएम बिहार में अकेले चुनाव लड़ सकती है। जेएमएम झारखंड में 12 से 15 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और अपनी मजदूब दावेदारी पेश कर रही है। बिहार के सीमावर्ती सीटों पर जेएमएम की दावेदारी है। तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, चकाई, बांका, ठाकुरगंज, रूपौली, बनमनखी, जमालपुर और धमदाहा जैसी सीटों पर जेएमएम दावेदारी कर रही है। पिछली बार जब जेएमएम ने अकेले चुनाव लड़ा था तो करीब आधा दर्जन सीटों पर अपनी छाप छोड़ी थी।

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बिहार विधानसभा की 243 सीटों में होने वाले चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन की ओर से आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी, सीपीआई, सीपीएम और माले का गठबंधन है। अबतक इस गठबंधन की हुई बैठक में जेएमएम को कोई बुलावा नहीं आया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि जब झारखंड के 81 सीटों में आरजेडी को 6 सीटे झारखंड विधानसभा चुनाव में दिया गया और सरकार बनने के बाद एक मंत्री का पद भी दिया गया तो जेएमएम के लिए भी आरजेडी और गठबंधन के अन्य दलों को उदार होना चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है। झारखंड में लगातार दूसरी बार सत्ता में आने और हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के रूप में पार्टी के दो बड़े नेताओं के नेतृत्व में झारखंड के बाहर भी अब जेएमएम मजबूत होगी। इन दोनों नेताओं के राजनीतिक प्रभाव का फायदा गठबंधन को मिल सकता है वहीं हेमंत सोरेन के पार्टी अध्यक्ष बनने और कल्पना सोरेन की स्टार प्रचारक होने का फायदा पार्टी और गठबंधन हो होगा।

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बिहार में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रभाव की अगर बात करें तो अबतक जेएमएम सिर्फ बिहार की एक सीट पर चुनाव जीत सकी है। 2010 के विधानसभा चुनाव में सुमित सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। सुमीत सिंह अभी चकाई से निर्दलीय विधायक है और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री है। वैसे करीब दर्जन भर सीटों पर जेएमएम और आदिवासी वोटरों का प्रभाव बिहार में दिखता है। जेएमएम के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांडे ने बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर कहा कि पार्टी ने अपने महाधिवेशन में झारखंड के साथ ही बिहार, असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडू, छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने का प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत बिहार के सीमावर्ती सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई है। जेएमएम महागठबंधन में समन्वय बनाने की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन उचित सम्मान नहीं मिलने पर अपने दम पर बिहार में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसका मतलब साफ है कि जेएमएम किसी भी स्थिति में बिहार का चुनाव लड़ेगी। पार्टी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी या नहीं ये सबसे बड़ा सवाल है, अगर जेएमएम को बिहार में उचित सम्मान नहीं मिला तो इसका असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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