Jairam Mahto की पार्टी 50 सीटों पर लड़ेगी विधानसभा का चुनाव, लंबोदर के चैलेंज और ढुलू से रिश्तों पर भी दिया जवाब

जयराम महतो ने विधानसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों का किया ऐलान

रांची: गिरिडीह संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करने वाले जेबीकेएसएस के जयराम महतो ने मंगलवार को दिल्ली से वापस आने के बाद मीडिया से खुलकर बात की। इस दौरान उन्होने मीडिया के हर सवालों का जवाब दिया। इसके साथ ही जयराम ने नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी रणनीति का खुलासा किया।

दिल्ली से लौटकर आने के बाद जयराम महतो ने कहा कि वो चुनाव आयोग के पास भी गए थे और उम्मीद है कि अगले एक महीने के अंदर पार्टी को नाम और सिंबल मिल जाएगा। लोकसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों को मिले वोट को आधार बनाये तो 50 सीटों पर चुनाव वो लड़ेगे। गोड्डा और जमशेदपुर सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन देरी हो गई अब विधानसभा चुनाव में इन जिलों में अपने उम्मीदवार खड़े किये जाएंगे। उन्होने कहा कि वो चुनाव रोजगार और युवाओं के मुद्दे पर लड़ेगे, उनको अगर सरकार बनेगी तो समय पर परीक्षा लिया जाएगा और सरकारी नौकरियों की भर्ती होगी। इस चुनाव में उनका किसी भी दल से गठबंधन नहीं होगा क्योकि उनकी विचारधारा हमसे मेल नहीं खाती है। जब चुनाव परिणाम आएगा तो जनता की राय लेंगे और उस आधार पर आगे का फैसला करेंगे।

जयराम महतो ने आगे कहा कि वो दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ेगे। मीडिया ने जब उनसे पूछा कि आपको डुमरी और गोमिया में बढ़त मिली थी क्या उन दोनों सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी है क्योकि गोमिया से आजसू विधायक लंबोदर महतो ने आपको चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। इस पर जयराम ने कहा कि लंबोदर जी सीनियर है वो सोच ले अगर हमको चैलेंज देंगे तो हम वही से चुनाव लड़ेगे, ये उनको महंगा पड़ जाएगा क्योकि हमें वहां 70 हजार वोट मिला था। हालांकि कई विधानसभा सीटों पर उन्हे बहुत सारे वोट मिले जिनमें बेरमो भी है जहां उन्हे करीब 50 हजार वोट मिले थे। जयराम ने कहा कि ये मिथक तोड़ दीजिये क्योकि हमें हर जाति, हर समुदाय से अच्छा वोट मिला है। हां ये जरूर सच है कि जो जिस जाति से आता है उस जाति का उसे अच्छा वोट मिलता है वो उसका बेस वोट होता है।

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जयराम महतो ने धनबाद से सांसद और पूर्व में बाघमारा से विधायक रहे ढुलू महतो से अपनी नजदीकियों पर कहा कि अगर उनका सपोर्ट हमको होता तो उनके विधानसभा क्षेत्र बाघमारा में हमको लीड मिला होता जबकि वहां चंद्रप्रकाश चौधरी को बढ़त मिली थी। उन्होने कहा कि उनको दिल्ली से फोन एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता का आया था, एक नेता से 18 मिनट और एक से 4 मिनट बात हुई लेकिन हमने साथ चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया, हमने कहा कि हमारी विचारधार आप से नहीं मिलती हम साथ चुनाव नहीं लड़ सकते।

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