भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध को हुआ तो किसकी जीत होगी हारेगा कौन ? जानकर खड़े हो जाएंगें रोंगटे ?

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Live Dainik

May 15, 2025

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डेस्कः पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर लीकेज की अफवाह चल रही है । भारत कह रहा है कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी । ट्रंप दुनिया को न्यूक्लियर खतरे का  ज्ञान दे रहे हैं । सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की पोस्ट आपकी निगाहों से गुजरे होंगे । पाकिस्तान पर एटम बम से खत्म कर दो । इसी तरह की बातें पाकिस्तानी लोग भी कर रहे हैं । अब सवाल ये उठता है क्या होगा भारत-पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर वार होती है तो। भारत-पाकिस्तान तो छोड़िए दुनिया के किसी भी देश में अगर कभी एटम बम का अटैक हुआ तो क्या होगा । अगर तबाही के नतीजे जानेंगे तो दोबारा शायद इस तरह की बातें भी ना सोचें । 

जी हां एटम बम, न्यूक्लियर वार या फिर हाइड्रोजन बम सुनने में तो सुरक्षा की गारंटी देता है लेकिन ये इतना खतरनाक है कि हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते  । जरा सोच कर देखिए किसी भी शहर में एटम बम गिरा तो क्या होगा। टाइम मैगजिन और अमेरिकन सोसाइड ऑफ साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक जिस भी इलाके में न्यूक्लियर अटैक होगा पल पर में राख हो जाएंगी-बड़ी-बड़ी इमारतें । इंसान भाप बन कर उड़ जाएगा। मकान-दुकान-सड़क-मिलिट्री कैंप कुछ भी नहीं बचेगा । चंद सेकेंड में सब धुआं- धुआं हो जाएगा।

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यदि परमाणु युद्ध छिड़ता है, तो दोनों पक्षों की ओर से पहले जवाबी हमले के लिए मिसाइलें दागी जाएंगी। भारत के पास परमाणु हमला करने की सामर्थ्य रखने वाली पनडुब्बियां और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, वहीं पाकिस्तान भी अपने परमाणु हथियारों को मोबाइल लॉन्चरों से सक्रिय करने में सक्षम है।

परमाणु युद्ध की शुरुआत EMP (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स) हमलों से होगी, जिससे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और बिजली ग्रिड पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे। उसके बाद सैन्य अड्डों, परमाणु ठिकानों और प्रमुख शहरों पर हमले होंगे।

परमाणु हमला महज़ 10 सेकंड में विनाश की भयंकर तस्वीर पेश कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही परमाणु बम फटता है, एक विशाल आग का गोला (फायरबॉल) बनता है, जो ज़ीरो ग्राउंड के आसपास की हर चीज़ को भाप में बदल देता है।

धमाके के साथ निकलने वाली ऊष्मा और विकिरण से कुछ ही पलों में आसपास की आबादी जलकर राख हो जाती है। कई सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झटका लहर (shockwave) लोगों के शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है—फेफड़े फट सकते हैं, कानों के पर्दे फट सकते हैं और अंदरूनी रक्तस्राव हो सकता है।

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इतना ही नहीं, ब्लास्ट के बाद उठने वाली आग शहरभर में फैल जाती है और एक विशाल अग्निकांड (firestorm) का रूप ले लेती है, जिससे बच पाना मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि भूमिगत बंकरों में छिपे लोग भी दम घुटने और जहरीली गैसों से मर सकते हैं।

परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले में लाखों नहीं, करोड़ों जानें जा सकती हैं और पृथ्वी पर वर्षों तक असर बना रह सकता है।

 वैज्ञानिकों का मानना है कि असली विनाश युद्ध के तुरंत बाद शुरू नहीं होता — सबसे घातक असर होगा “परमाणु सर्दी” का। परमाणु विस्फोटों से पैदा हुए काले धुएं से सूरज की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंचेगी। इससे धरती का तापमान तेजी से गिर जाएगा। अनुमान है कि भारत, पाकिस्तान और चीन समेत कई एशियाई देशों में खाद्य उत्पादन ठप हो जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे युद्ध की स्थिति में 5 अरब से अधिक लोग भूख से मर सकते हैं।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आज के हाइड्रोजन बम हिरोशिमा पर गिराए गए बम से हजारों गुना शक्तिशाली हैं। ऐसे में एक बड़े शहर पर हमला पूरी दुनिया के वातावरण को प्रभावित कर सकता है। न्यूक्लियर वार के विरोधियों को अक्सर अगाह करते हुए सुना जा सकता है “परमाणु युद्ध का कोई विजेता नहीं होता — यह सिर्फ विनाश लाता है।”

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