बोकारो: विश्व आदिवासी दिवस 2025 के अवसर पर जिला प्रशासन – आदिवासी समाज द्वारा दिशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन को समर्पित श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोमिया प्रखंड के ललपनिया पंचायत के लुगुबुरू आदिवासियों के विश्व विख्यात धर्मस्थली में किया गया। इस मौके पर उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह समेत जिले के अन्य पदाधिकारी और आदिवासी समाज के गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। आदिवासी समाज की ओर से आयोजित इस सभा में दिशोम गुरु के जीवन, संघर्ष और आदिवासी चेतना के प्रति उनके योगदान को भावपूर्ण ढंग से याद किया गया। सभा की शुरुआत दो मिनट का मौन रखकर बाबा दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। सभा को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि समाज को नशामुक्त बनाना और शिक्षा को हर घर तक पहुँचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्ति, शिक्षा का विस्तार और समग्र विकास – यही बाबा दिशोम गुरु को हमारी ओर से सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जिले का एक भी बच्चा बुनियादी शिक्षा से वंचित नहीं हो, इसके लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। सभी का नामांकन आंगनबाड़ी केंद्रों, आंगनबाड़ी केंद्र से प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय से उच्च विद्यालय में हो, इसकी निगरानी की जाएगी।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नशा और सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, कौशल और रोजगार की दिशा में आगे बढ़ना ही भविष्य को उज्जवल बनाएगा। उन्होंने बाबा शिबू के नाम से नशामुक्ति का अभियान चलाने, समाज को जागरूक करने की बात कहीं। उपायुक्त ने बाबा दिशोम गुरु के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा शुरू किए गए रात्रि पाठशाला एवं उनकी समाज सुधारक की भूमिका के संबंध में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि बाबा शिबू सोरेन की लुगुबुरू में आदमकद प्रतिमा बनेगी । इसके लिए समाज के लोगों से स्थान चिन्हित करने को कहा गया है।
मौके पर अपने संबोधन में पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने बाबा शिबू सोरेन के जीवनी, उनके संघर्ष के संबंध में बताया। यह सब क्षेत्र जो कभी अति नक्सल प्रभावित हुआ करता था, लगातार विकास – प्रगति के कारण ही यहां की पूरी तस्वीर अब बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि पूरा प्रशासन आमजनों के साथ है।
उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने बाबा लुगुबुरू के मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने जिले और राज्यवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और आपसी भाईचारे के लिए विशेष प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि लुगुबुरू केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। एसडीओ बेरमो मुकेश मछुआ ने भी अपने संबोधन में कहा कि बाबा दिशोम गुरु द्वारा सूदखोरी और महाजनीय प्रथा के विरुद्ध किए गए आंदोलन एवं किसानों, दलित पीड़ित सभी वर्गों के शोषण को बंद करने के लिए किए गए कार्य को भुलाया नहीं जा सकता। मौके पर आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।
आदिवासियों की विश्व प्रसिद्ध धर्मस्थली लुगुबुरू में लगेगी गुरुजी की आदमकद प्रतिमा

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