ईडी और रांची पुलिस का विवाद चर्चा में है। हालांकि हाई कोर्ट से ईडी अधिकारियों को राहत मिली गई है, लेकिन दो जांच एजेंसियों के बीच तकरार की वजह क्या है। इसके बारे में जानते है। दरअसल, ईडी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में 23 करोड़ रुपये से अधिक के गबन के मामले की जांच कर रही है।
इस मामले में आरोपित कैशियर संतोष कुमार ईडी के अधिकारियों के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है। उसके बाद तत्काल पुलिस ईडी कार्यालय जांच करने पहुंच गई और हंगामा हो गया। एजेंसी ने इसे सबूतों से छेड़छाड़ और जांच बाधित करने का आरोप लगा दिया।
गबन के मामले में संतोस के विरुद्ध रांची के सदर थाने में 28 दिसंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज हुई थी और इसके बाद वह जेल भेजा गया था। जेल से छूटने के बाद गत वर्ष नवंबर महीने में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव से मिलकर संतोष कुमार ने गबन में शामिल अभियंताओं की शिकायत की थी।
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इन अभियंताओं में तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह के नाम शामिल थे। उसने इन तीनों के विरुद्ध सचिव से लिखित शिकायत भी की थी।
वह बिना समन के ही 12 जनवरी को ईडी कार्यालय भी यही बताने गया था कि वह जितना दोषी है, उससे कहीं ज्यादा दोषी ये तीनों हैं, जिन्होंने उससे गलत ट्रांजेक्शन करवाए। सूचना है कि इसके बाद ईडी अधिकारी के माध्यम से जांच जारी रहने की बात बताने पर उग्र हो गया और तनाव में उसने शीशे के जग को अपने सिर में मार लिया था।
गबन के आरोपित कैशियर संतोष कुमार ने विभागीय सचिव को लिखित जानकारी देकर बताया था कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर और तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि ने अप्रैल 2023 से अगस्त 2023 तक और मई 2023 से सितंबर 2023 तक मूल रोकड़बही को नष्ट कर जाली रोकड़बही तैयार करने का आदेश दिया था।
तत्कालीन दोनों ही अभियंताओं के निर्देश पर ही संतोष कुमार ने उस अवधि के रोकड़बही का प्रभार 21 दिसंबर 2023 को कुमार साकेत को सौंपा था।
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इन अभियंताओं ने सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई, सरकारी दस्तावेज में छेड़छाड़ की और व्यक्तिगत लाभ के लिए नियम विरुद्ध कार्य किया। कैशियर संतोष कुमार ने विभागीय सचिव को बताया है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह ने व्यक्तिगत लाभ के लिए सभी नियमों को ताक पर रखकर एजेंसी मेसर्स प्रवीण कुमार जैन के साथ दो जनवरी 2019 को अवैध एकरारनामा कराया था।
जबकि, एकरारनामा के लिए बैंक आफ बड़ौदा के दिल्ली स्थित रानीबाग शाखा से चार जनवरी 2019 को 5.25 लाख रुपये के जमानत राशि संबंधित ड्राफ्ट बनवाया था। उसने बर्खास्त कराने की धमकी देकर अवैध एकरारनामा पर संतोष कुमार का हस्ताक्षर करवा दिया था।
अब तक की जांच में ईडी ने पाया है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा रांची के कोषागार कार्यालय के पदाधिकारियों की मिलीभगत से कैशियर संतोष कुमार व उसकी कंपनी मेसर्स राकड्रिल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में कुल 22 करोड़ 93 लाख 42 हजार 947 रुपये स्थानांतरित हुए थे।
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जांच में यह भी साबित हुआ था कि संतोष कुमार ने तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह के निर्देश पर दिसंबर 2022 में मेसर्स राकड्रिल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी बनाई थी।
संतोष कुमार व उसकी कंपनी के खाते में स्थानांतरित कुल 22.93 करोड़ रुपये में से 12 करोड़ रुपये की नकदी निकासी व 12 करोड़ दो लाख रुपये 11 लोगों के खाते में स्थानांतरित हुए थे।
जिनके खाते में रुपये स्थानांतरित हुए थे उनमें तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह को 1.75 करोड़ रुपये, दूसरे कार्यपालक अभियंता राधेश्याम के खाते में एक करोड़ रुपये, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर के खाते में तीन करोड़ रुपये शामिल थे।
इसके अलावा तत्कालीन अधीक्षण अभियंता निरंजन कुमार के खाते में 80 लाख रुपये, डिविजनल अकाउंटेंट परमानंद कुमार के खाते में एक करोड़ रुपये, डिविजनल अकाउंटेंट स्व. सुरेंद्र पाल मिंज के खाते में 30 लाख रुपये, कोषागार पदाधिकारी मनोज कुमार के खाते में
15 लाख रुपये, कोषागार पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा के खाते में 85 लाख रुपये, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कर्मी संजय कुमार सिंह के खाते में 10 लाख रुपये, कर्मी रंजन कुमार सिंह के खाते में सात लाख रुपये स्थानांतरित किए गए थे। कैशियर संतोष कुमार ने स्वयं अपने खाते में तीन करोड़ रुपये स्थानांतरित किए थे।




