लोहरदगा : जिले में प्रशासनिक कामकाज को चुस्त-दुरुस्त करने और राजस्व मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने शनिवार को कुडू अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। अचानक कार्यालय पहुंचे उपायुक्त ने कर्मचारियों की उपस्थिति से लेकर राजस्व मामलों के निष्पादन और विभिन्न सरकारी पंजियों के संधारण तक की विस्तृत पड़ताल की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आम लोगों से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सह प्रभारी पदाधिकारी कुडू अंगार नाथ स्वर्णकार, अंचल अधिकारी संतोष उरांव सहित अंचल निरीक्षक और संबंधित कर्मी मौजूद रहे।


हर पंजी की जांच, रिकॉर्ड दुरुस्त रखने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सबसे पहले अंचल कार्यालय में स्वीकृत और कार्यरत कर्मियों की संख्या की जानकारी ली। उन्होंने कर्मियों की उपस्थिति, कार्य विभाजन और उनके दायित्वों के निर्वहन की स्थिति भी देखी। इसके बाद आगत-निर्गत पंजी, अनुक्रमणिका पंजी, कर्म पुस्तिका, कार्य तालिका, दैनिक उपस्थिति पंजी, आकस्मिक अवकाश पंजी और सेवा पुस्तिका समेत कई अभिलेखों की जांच की। उपायुक्त ने चौकीदारों की संख्या और उन्हें सौंपे गए दायित्वों की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सभी पंजियों में प्रविष्टियां नियमित रूप से अपडेट होनी चाहिए। रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही से प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, इसलिए अभिलेखों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखना जरूरी है।

नामांतरण और सीमांकन में देरी पर सख्ती
राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने पेंशन एवं उपादान पंजी, सैरात पंजी, नामांतरण पंजी, भूमि सीमांकन पंजी तथा ऑनलाइन पंजी-2 प्रविष्टि एवं सुधार पंजी का निरीक्षण किया। उन्होंने नामांतरण, भूमि सीमांकन और ऑनलाइन राजस्व मामलों के निष्पादन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाने का निर्देश दिया। पुराने लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और प्राथमिकता के आधार पर उनके निष्पादन की कार्रवाई करने को कहा। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब आम लोगों की परेशानी बढ़ाता है।

प्रमाण-पत्र के लिए भी समय सीमा तय
जाति, आय और आवासीय प्रमाण-पत्र से संबंधित आवेदनों की भी उपायुक्त ने समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए। किसी आवेदन को बिना उचित कारण लंबित नहीं रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों को छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए बार-बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। प्राप्त आवेदनों की नियमित निगरानी करते हुए समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

अंचल कार्यालय में जवाबदेही जरूरी
उपायुक्त ने तत्काल पंजी, लगान वसूली, प्राकृतिक आपदा पंजी, रोकड़ पंजी, स्थापना पंजी, अंकेक्षण पंजी और खतियान-अवशेष पंजी समेत अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों का भी अवलोकन किया। उन्होंने पंजियों में पारदर्शिता, शुद्धता और अद्यतन प्रविष्टियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंचल कार्यालय सीधे आम नागरिकों से जुड़ा होता है। इसलिए राजस्व एवं प्रमाण-पत्र से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए।







