रांचीः 1 फरवरी 2024 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के लिये अंतरिम बजट पेश करेंगी। यह साल सरकार के कार्यकाल का अंतिम साल है जिसमें लोकसभा का आम चुनाव होना है और चुनाव के उपरांत नयी सरकार का गठन होगा। ऐसे ही मौके के लिए अंतरिम बजट की संकल्पना की गई है।
आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला का कहना है कि अंतरिम बजट एक वैसी वित्तीय रुपरेखा है जिसमें नई सरकार के गठन हो जाने और उसके द्वारा सालाना बजट पेश करने तक की अवधि के लिये जरुरी खर्चों का प्रबंधन करना मौजूदा सरकार का दायित्व होता है। और इसी निमित्त अंतरिम बजट चुनावी साल मे लाये जाने की व्यवस्था की गयी है। अब थोड़ी चर्चा बजट आकार, कैपिटल एक्सपेंडीचर और फिसकल डिफिसिट के अनुमानों पर भी कर लेते हैं।
पिछले बजट मे चालू वित्त वर्ष के लिए 45 लाख करोड़ रुपये का कुल खर्च आकलित था। जो इस बार बढ़कर 49 लाख करोड़ रुपये के आसपास होगा। कैपिटल एक्सपेंडीचर वह खर्च है जो इकोनॉमी को गति प्रदान करता है साथ ही नौकरियां भी बढ़ाता है
पिछले बजट मे 10लाख करोड़ रुपये का प्रावधान पूंजी गत खर्च के मद मे किया गया था जिसे 15 से 20 प्रतिशत बढ़ाकर 11.50 से 12 लाख करोड़ किये जाने की संभावना है। यद्यपि यह बढ़त पिछली बढ़तों की तुलना मे कम रहेगी क्योंकि सरकार को वित्तीय सुदृढ़ीकरण भी देखना जरूरी हो गया है। फिसकल डिफिसिट यानि राजकोषीय घाटा 5.9 प्रतिशत रखा गया था और इस घाटे को आगामी दो वित्त वर्षों मे कम करके 4.5 प्रतिशत पर लाने की जिम्मेदारी सरकार की है। इसलिए इस घाटे को कम करके 5.2 से 5.3 प्रतिशत के आसपास रखना चाहेगी।
सरकार की ओर से अपने खर्चों को चलाने के लिये उधार लेने की जो जरूरत पड़ती है उसी आंकड़ा को फिसकल डिफिसिट कहा जाता है। सरकार जितना अच्छा संतुलन कैपिटल एक्सपेंडीचर और फिसकल डिफिसिट मे बैठा पाती है बजट को उतना ही अच्छा समझा जाता है।
Budget 2024: आगामी वित्त वर्ष में खर्च बढ़कर 49 लाख करोड़ होने का अनुमानः सूर्यकांत शुक्ला

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