JPSC-JSSC Scam: टीडीपीएल ने बिना एग्रीमेंट लखनऊ की पिकर टेक्नोलॉजी से कराया 10 परीक्षाओं का संचालन, CID की पूछताछ में खुलासा

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September 3, 2026

जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक: अभ्यर्थियों को कोलकाता में प्रश्न-उत्तर रटवाने वाले पटना और छपरा के दो एजेंट CID रिमांड पर

रांचीः जेपीएससी की परीक्षाओं में हुई धांधली मामले में सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौकाने वाले खुलासे हो रही हैं। जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता, कथित पेपर ली, ओएमआर शीट में हेराफेरी मामले की जांच कर रही सीआइडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) व उसकी सहयोगी एजेंसी मेसर्स पिकर टेक्नोलोजी से संबद्ध गिरफ्तार कर्मी उस्मान का भी बयान लिया है।

पिकर टेक्नोलोजी उत्तर प्रदेश के लखनऊ की एजेंसी है। उस्मान ने सीआइडी को पूछताछ में बताया है कि वैधानिक अधिकार नहीं होने के बावजूद उसकी एजेंसी पिकर टेक्नोलोजी से अधिकृत एजेंसी टीडीपीएल ने सिर्फ मौखिक रूप से दस परीक्षाओं का संचालन कराया था।
पिकर टेक्नोलोजी से जेपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, रेगुलर व बैकलाग 2025, बैकलाग 2023, ड्रग इंस्पेक्टर व एपीपी जैसी परीक्षाओं के लिए ओटीआर व प्रवेश पत्र जारी करने का काम कराया गया था। इस काम के बदले टीडीपीएल ने उसे कुल बिलिंग की 20 प्रतिशत राशि का भुगतान किया था।
उस्मान ने बताया कि वह पहले पिकर टेक्नोलोजी में कार्यरत था। जून 2025 में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने उसे लखनऊ स्थित एजेंसी के दफ्तर में बुलाया था। परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल का लखनऊ में भी दफ्तर था।

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वहां रामवीर सिंह ने पिकर टेक्नोलोजी को जेपीएससी परीक्षा पोर्टल का काम सौंपा था। वहीं पर रामवीर सिंह ने 20 प्रतिशत कमीशन पर बिल भुगतान का प्रलोभन दिया था। सीआईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि जेपीएससी के गाइडलाइंस व प्रश्नपत्र हैदराबाद की हाइटेक प्रिंटिंग एजेंसी को ईमेल व वाट्सएप से भेजे गए थे।

हैदराबाद में प्रिंटिंग के बाद जब सील प्रश्नपत्र रांची आए तो उसे इसी अनधिकृत एजेंसी पिकर टेक्नोलोजी ने ही रिसीव किया था। अब सीआइडी लखनऊ के पते पर 2017 में पंजीकृत पिकर टेक्नोलोजी के बाकी निदेशकों की भूमिका की भी अब जांच कर रही है।

टीडीपीएल को टेंडर दिलाने के लिए उस्मान लगाता था ऊंची बोली
जेपीएससी की परीक्षाओं से संबंधित टेंडर टीडीपीएल को दिलाने के लिए उस्मान पिकर टेक्नोलोजी की ओर से ऊंची बोली लगाता था। वह स्वयं टीडीपीएल से जुड़ा था, लेकिन दूसरी कंपनी पिकर टेक्नोलोजी की ओर से टेंडर में जानबूझकर ऊंची बोली लगाता था।
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के निर्देश पर दस्तावेज तैयार करता था। जैसे किसी टेंडर का वास्तविक मूल्य 50 रुपये था तो पिकर टेक्नोलोजी 100 रुपये की बिड डालती थी। इसके बाद टीडीपीएल 80 रुपये की बिड लगाकर आसानी से टेंडर हासिल कर लेती थी।इस पूरे फर्जीवाड़े में रामवीर सिंह ने उसे पैसे भेजे। अधिकांश भुगतान नकदी में हुए हैं। रामवीर के कहने पर उसके मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने उस्मान को 25 लाख रुपये का भुगतान किया था।

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