लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने वाला बिल आया सामने, परिसीमन के बाद बढ़ जाएंगीं सीटें; विशेष सत्र में होगी बहस

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April 14, 2026

नई दिल्ली:  केंद्र सरकार ने मंगलवार को तीन विधेयक सार्वजनिक किए हैं, जिनसे नवीनतम जनगणना के आधार पर नए परिसीमन (Delimitation) का रास्ता साफ होगा और लोकसभा की संख्या वर्तमान 545 से बढ़ाकर संभावित रूप से 850 तक की जा सकेगी। साथ ही संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू किया जाएगा।

यह विधायी पैकेज तीन बिलों से मिलकर बना है—संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। यह 2023 के संविधान (106वें संशोधन) अधिनियम पर आधारित है, जिसमें महिला आरक्षण को भविष्य की जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था।

किनती बढ़ेगी सीटों की संख्या?

दरअसल मोदी सररकार  उस संवैधानिक प्रावधान को हटाना चाह रही है जिसमें सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर तय था। अब नए संशोधन के तहत “ताजा प्रकाशित जनगणना” के आधार पर परिसीमन किया जा सकेगा, जिससे जनसंख्या के वर्तमान स्वरूप के अनुसार सीटों का पुनर्वितरण होगा। नए संशोधन में राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे सदन का आकार काफी बड़ा हो जाएगा।

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कहां-कहां होगा बदलाव

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत अनुच्छेद 81 में संशोधन किया जाएगा, जो लोकसभा की संरचना से जुड़ा है। इसके तहत लोकसभा की अधिकतम संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। साथ ही अनुच्छेद 82 के शीर्षक को “हर जनगणना के बाद पुनर्समायोजन” से बदलकर “निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्समायोजन” किया जाएगा। इसके अलावा राज्य विधानसभाओं और SC/ST आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन होगा।

परिसीमन आयोग की भूमिका

परिसीमन विधेयक के तहत एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश करेंगे। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे। आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी जाएंगी। यह आयोग राज्यों के बीच सीटों का बंटवारा करेगा, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करेगा और SC, ST तथा महिलाओं के लिए आरक्षण निर्धारित करेगा।

महिलाओं का आरक्षण लागू होगा

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद  2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने का रास्ता भी साफ करेगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिनमें SC और ST की सीटें भी शामिल होंगी। यह आरक्षण 15 वर्षों तक लागू रहेगा।

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दक्षिण के राज्य हो रहे हैं नाराज 

यह कदम एक संवेदनशील मुद्दे को भी फिर से सामने लाता है—राज्यों के बीच सीटों का पुनर्वितरण। दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है, जबकि हिंदी भाषी राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में नई जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा दक्षिण राज्यों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्यों के मौजूदा अनुपात में बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है और कहा है कि अगर दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश की गई तो सड़क पर आंदोलन होगा । उन्होंने वीडियो संदेश में  चेतावनी वाले लहजे में कहा कि ” यह वीडियो दो उद्देश्यों की पूर्ति करता है: पहला, उस गंभीर खतरे के बारे में बात करना जो अब तमिलनाडु के दरवाज़े तक पहुंच चुका है, और दूसरा, केंद्र की बीजेपी सरकार को स्पष्ट चेतावनी देना।”

“चुनावी प्रचार की तेज़ रफ्तार के बीच भी इस कर्तव्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परसों, यानी 16 अप्रैल को संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया है। और अधिक सटीक रूप से कहें तो, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच इसे जबरन बुलाया गया है।”

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“इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन (डिलिमिटेशन) पर एक संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित करने का इरादा रखती है।”

“शुरू से ही हम इसके खिलाफ लगातार चेतावनी देते रहे हैं। हमने लोगों के बीच जागरूकता फैलाई है। सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को एकजुट किया है, जो इससे प्रभावित हो सकते हैं, और चेन्नई में संयुक्त कार्रवाई समिति की बैठक आयोजित की।”

आगे क्या होगा

परिसीमन आयोग पहले ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी करेगा, फिर आपत्तियां मांगी जाएंगी और सार्वजनिक सुनवाई होगी। इसके बाद अंतिम आदेश जारी किया जाएगा, जिसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन किया है, लेकिन परिसीमन को लेकर चिंता जताई है। खासकर OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग भी उठ रही है।

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