रांची में बालू माफियाओं का ‘मकड़ी जाल’, हर 2 किमी पर होती हैं निगरानी

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April 14, 2026

रांची में बालू माफियाओं का ‘मकड़ी जाल’, हर 2 किमी पर होती हैं निगरानी

DESK:रांची में अवैध बालू कारोबार ने संगठित सिंडिकेट का रूप ले लिया है। बुंडू, सोनाहातू और सिल्ली क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर बालू की तस्करी की जा रही है। माफियाओं ने ऐसा नेटवर्क खड़ा कर रखा है कि उद्गम स्थल (नदी घाट) से लेकर डंपिंग यार्ड तक हर दो किलोमीटर पर उनके लोग तैनात रहते हैं, जो गतिविधियों पर नजर रखते हैं।बुंडू-नामकुम क्षेत्र के एक बालू कारोबारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वह वर्षों से इस कारोबार में हैं, लेकिन घाटों की नीलामी नहीं होने के कारण वैध तरीके से काम करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अधिकांश कारोबारी अवैध रास्ता अपनाने को मजबूर हैं।

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सूत्रों के अनुसार, बालू ढुलाई के लिए हाइवा, टर्बो और ट्रैक्टर का अलग-अलग रेट तय है। पूरा कारोबार एक तय सिस्टम और दरों के आधार पर संचालित होता है।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की भूमिका को लेकर चर्चा है। बुंडू क्षेत्र में आनंद साहू और तेजू महतो, जबकि सिल्ली क्षेत्र में मुरली, परदेसी और शंकर के नाम सामने आ रहे हैं। वहीं, अरशद को इस नेटवर्क का अहम कड़ी माना जा रहा है। बताया जाता है कि नदियों से बालू निकालने से लेकर अवैध कमाई के संग्रह तक का काम इनके इशारे पर होता है।
जानकारी के अनुसार, रांची जिले में 100 से अधिक अवैध डंपिंग यार्ड बनाए गए हैं। नदियों से बालू निकालकर इन्हीं यार्डों में जमा किया जाता है, जहां से बाद में शहर के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति की जाती है।
रांची के बुंडू से प्रतिदिन 200 से ज्यादा हाइवा
रांची के सिल्ली से भी प्रतिदिन 200 से ज्यादा हाइवा

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तस्करी के लिए तय रूट भी बनाए गए हैं। सिल्ली से टाटीसिल्वे होते हुए बालू रांची पहुंचता है, जबकि बुंडू और सोनाहातू से नामकुम के रास्ते शहर में प्रवेश कराया जाता है। इसके अलावा आसपास के जिलों से भी सैकड़ों की संख्या में हाइवा और टर्बो रोजाना रांची पहुंचते हैं।राजधानी होने के कारण रांची में बालू की मांग अधिक है, जिससे यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद तस्करी पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।

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