डेस्कः माओवादी संगठन के थिंक टैंक कहे जाने वाले और प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का 3 अप्रैल 2026 को रांची के बिरसा मुंडा जेल में मौत हो गई। एक करोड़ के इनामी प्रशांत बोस के निधन के एक हफ्ते बाद उनकी अंतिम चिट्ठी सामने आई है। माओवादी संगठन से जुड़े इस अहम पत्र सामने आने के बाद अंदरूनी रणनीति और मौजूदा हालात सामने आई है। रांची जेल में ‘किशन दा’ की मौत से पहले लिखे गए इस पत्र में संगठन की स्थिति को “बेहद जटिल और गंभीर” बताया गया है।
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पत्र ‘कॉमरेड सागर’ के नाम लिखा गया है, जिन्हें मिसिर बेसरा के रूप में पहचाना जाता है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि वर्तमान घरेलू परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष (आर्म्स स्ट्रगल) को आगे बढ़ाना अब लगभग असंभव होता जा रहा है।पत्र में उल्लेख किया गया है कि सीआरबी और ईआरबी जैसे क्षेत्रों में संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके चलते मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। किशन दा ने सवाल उठाया है कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र संघर्ष को जारी रखना व्यावहारिक और सही कदम होगा।
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उन्होंने सुझाव दिया था कि इस मुद्दे पर गंभीरता से मंथन किया जाना चाहिए, क्योंकि बिना हालात को समझे आगे बढ़ने से नुकसान और बढ़ सकता है। पत्र में चेतावनी भी दी गई है कि यदि मौजूदा स्थिति में इसी दिशा में कदम बढ़ाया गया, तो कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा और हालात और उलझ सकते हैं।

पत्र के अंत में संवाद जारी रखने के संकेत भी दिए गए हैं। एक फोन नंबर साझा करते हुए ‘कॉमरेड सागर’ से जल्द प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया था, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। साथ ही, सतर्कता और सावधानी बरतने की अपील भी की गई थी।


