रांची के रातू में बच्ची की मुंहबोले भाई ने कर दी हत्या, लापता होने की कहानी गढ़ी, आरोपी के पिता ने गयाजी में कराया अंत्येष्टि

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April 6, 2026

रांचीः राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र के झखराटांड से लापता 13 साल की नाबालिग बच्ची राजनंदिनी के मामले में पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में जांच में जानकारी मिली है कि राजनंदिनी की 13 मार्च की रात में ही उसके मुंहबोले भाई राहुल उर्फ अक्षय ने हत्या कर दी थी। फिर शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर गुप्त तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में जब ग्रामीणों और पड़ोसियों को शक हुआ, तो मामले का खुलासा हुआ। हालांकि पुलिस की ओर से फिलहाल मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। आरोपी सुबोध पाठक पूजा-पाठ कराने का काम करता है और उसका इलाके में दोतल्ला मकान भी है। हत्या के बाद आरोपी परिवार तीन दिनों तक घर से गायब रहा। 16 मार्च को लौटने के बाद भी बच्ची के गायब होने की कहानी गढ़ी गयी। परिवार द्वारा बच्ची की आत्मा की शांति के लिए बंद कमरे में गरुड़ पुराण का पाठ कराया गया, ताकि किसी को कोई शक नहीं हो।

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आरोपियों ने चार दिनों तक किया गुमराह, पांचवें दिन स्वीकारी सच्चाईः आरोपियों ने चार दिनों तक पुलिस और ग्रामीणों को गुमराह किया। लेकिन लगातार पूछताछ के बाद पांचवे दिन राहुल उर्फ अक्षय ने सच्चाई स्वीकार कर ली। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस जांच में पारिवारिक विवाद और प्रेम-प्रसंग की बात सामने आयी है। जानकारी के अनुसार, सुबोध पाठक और उसके पुत्र अक्षय के बीच अक्सर विवाद होता था। घटना की रात में भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जिसमें राजनंदिनी ने अपने फूफा सुबोध का पक्ष लिया। इससे नाराज होकर राजनंदिनी के मुंहबोले भाई राहुल ने उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गयी। बताया जाता है कि बच्ची का राहुल के साले के साथ प्रेम-प्रसंग भी परिवार को नागवार गुजर रहा था, जिसे लेकर भी तनाव था।
अस्पताल संचालक की भूमिका है संदिग्धः घटना के बाद कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक मौके पर सुबोध पाठक के घर पहुंचा और बच्ची को मृत घोषित किया। इसके बाद उसकी मदद से एंबुलेंस के जरिये शव को गयाजी ले जाकर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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बच्ची आठ वर्षो से परिवार को ही मानती थी अपनाः मृत बच्ची राजनंदिनी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी सामने आयी है। बताया गया कि राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव की निवासी दिनेश मइवार की दूसरी पत्नी की पुत्री थी। दिनेश मइवार शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं तथा उसकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। इसी परिस्थिति को देखते हुए परिवार के परिचत रातू निवासी सुबोध पाठक राजनंदिनी को अपने साथ ले आये थे, ताकि उसका बेहतर पालन-पोषण हो सके। पिछले करीब आठ वर्षो से राजनंदिनी सुबोध पाठक के घर में रह रही थी और उन्हें फूफा कहकर संबोधित करती थी। बताया जाता है कि सुबोध पाठक ने राजनंदिनी के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था। धीरे-धीरे राजनंदिनी ने पाठक परिवार को ही अपना असली परिवार मान लिया था।

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खुलासे के बाद आरोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार
ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में हुई जांच में घटना परत दर पतर खुलती चली गयी। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी सुबोध पाठक और उसके पुत्र अक्षय पाठक को गिरफ्तार कर लिया है। एंबुलेंस चालक पिंटू कुमार को हिरासत में रखा गया है। वहीं कमलेश मेमोरियल अस्पताल के संचालक अमरेश पाठक फरार है। उसने मृत बच्ची के गयजी में अंतिम संस्कार कराने में मदद की थी। एंबुलेंस जब्त कर ली गयी है।

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