लोहरदगा: अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने गंभीर चिंता जताते हुए इसे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे प्रतीत होते हैं मानो ‘मुहब्बत और जंग में सबकुछ जायज’ की सोच को व्यवहार में उतारा जा रहा हो, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के भी कुछ नियम, मानक और रणनीतिक सीमाएं तय होती हैं, जिनका पालन किया जाना बेहद आवश्यक है।सुखदेव भगत ने कहा कि वर्तमान घटनाक्रम में इन सभी मानकों को दरकिनार किया जा रहा है और ऐसे संवेदनशील ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जिनका प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को उसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। विशेष रूप से ऊर्जा संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता गहराने की आशंका है। उन्होंने आगाह किया कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो इसका असर आम लोगों के जीवन पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों, खासकर संयुक्त राष्ट्र संगठन, और विकसित देशों से अपील की कि वे इस गंभीर स्थिति में सक्रिय हस्तक्षेप करें और शांति बहाली की दिशा में ठोस पहल करें। उनके अनुसार, विश्व समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है कि किसी भी संघर्ष को युद्ध में तब्दील होने से रोका जाए, क्योंकि युद्ध कभी भी किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं देता, बल्कि नई जटिलताओं और संकटों को जन्म देता है। भारत की भूमिका पर जोर देते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा एक शांति प्रिय राष्ट्र के रूप में रही है और आज भी देश को वैश्विक मंच पर शांति दूत की भूमिका निभाते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपनी ऐतिहासिक और नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए दुनिया को शांति का संदेश देना चाहिए।सांसद ने केंद्र सरकार से यह मांग भी की कि संसद के वर्तमान सत्र के दौरान इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि देश की विदेश नीति को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे और एक स्पष्ट, संतुलित और प्रभावी रणनीति सामने आ सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सभी दलों की भागीदारी के साथ विचार-विमर्श जरूरी है, जिससे देश एक मजबूत और एकजुट रुख दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सके। कुल मिलाकर, सुखदेव भगत के इस बयान ने न केवल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात की गंभीरता को उजागर किया है, बल्कि शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो चुका है।







