डेस्कः पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंद ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं लद्दाख के लेफ्टिनेंट गर्वनर के भी पद छोड़ने की खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल के गर्वनर सीवी आनंद दिल्ली में थे और इसी बीच उनके इस्तीफे की खबर आई है। दिल्ली दौरे के दौरान ही सीवी आनंद बोस ने राज्यपाल पद से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार तमिलनाडु के राज्यपाल सीवी रवि को अस्थायी रूप से बंगाल के राज्यपाल का दायित्व सौंपा गया है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल का इस्तीफा सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है। राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद सीवी आनंद बोस ने पीटीआई को बताया कि मैंने गवर्नर के ऑफिस में काफी समय बिताया है।जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने के बाद सीवी आनंद बोस को 23 नवंबर, 2002 को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वह करीब तीन साल पांच महीने तक इस पद पर रहे।
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राज्यपाल के तौर पर आनंद बोस शुरू से ही राज्य के कई मुद्दों पर मुखर रहे। वह पश्चिम बंगाल सरकार की ममता बनर्जी की सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करते रहे हैं।उनके कार्यकाल के दौरान, कई मुद्दों पर राज्य और राज्यपाल के बीच टकराव बढ़ गया।दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं हैरान और बहुत परेशान हूं।उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के पीछे की वजहें मुझे अभी पता नहीं हैं।हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला हो। केंद्रीय गृह मंत्री ने अभी मुझे बताया कि आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया जा रहा है। उन्होंने इस बारे में तय रिवाज के मुताबिक मुझसे कभी सलाह नहीं ली।उन्होंने कहा किऐसे काम भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और हमारे फेडरल स्ट्रक्चर की बुनियाद पर ही हमला करते हैं।केंद्र को कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक रिवाजों और राज्यों को कमजोर करते हैं।





