डेस्कः बिहार में भ्रष्टाचार की भेट एक और पुल चढ़ गया। बक्सर जिले के इटाढ़ी रेलवे गुमटी पर 26 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) उद्घाटन के मात्र चार दिन बाद ही क्षतिग्रस्त हो गया। पाया संख्या 5 पूरी तरह ढह जाने से स्थानीय प्रशासन ने पुल पर आवागमन बंद कर दिया और इसे लोहे की प्लेटों से ढक दिया।
लोगों ने भ्रष्टाचार का लगाया आरोप: इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। उन्होंने सरकार पर कमीशनखोरी और घटिया निर्माण का आरोप लगाया है। बिहार में लगातार पुलों के गिरने की घटनाओं के बीच यह नया मामला सामने आया है, जिससे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
चार बार हुआ शिलान्यास, फिर भी टूटा पुल: आरओबी का शिलान्यास चार बार किया गया था। काफी विरोध और देरी के बाद निर्माण पूरा हुआ और इसे हाल ही में आमजन के लिए खोला गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही आशंकाएं जताई जा रही थी।

क्षति छिपाने की कोशिश: पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद पत्रकारों और आम लोगों को जानकारी न हो, इसके लिए पूरे इलाके में आवागमन बंद कर दिया गया और क्षतिग्रस्त हिस्से को लोहे की प्लेटों से ढक दिया गया। इससे जनता में और अधिक संदेह बढ़ गया है।
ओवरलोड का दावा, भ्रष्टाचार से इनकार: आरओबी के केयरटेकर मुन्ना कुमार ने बताया कि पुल ओवरलोड ट्रक के कारण गिरा है, भ्रष्टाचार से इसका कोई संबंध नहीं है।हालांकि स्थानीय लोग इस दावे को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और मांग कर रहे हैं कि घटना की निष्पक्ष जांच हो।
बक्सर-इटाढ़ी-धनसोई को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल: यह आरओबी बक्सर को इटाढ़ी एवं धनसोई क्षेत्र से जोड़ने के लिए बनाया गया था, ताकि रेलवे पटरी पार करने में होने वाली परेशानी दूर हो सके। इसकी असफलता से स्थानीय यातायात व्यवस्था पर असर पड़ा है।
जांच की मांग तेज: घटना के बाद अब इस आरओबी के निर्माण में हुई अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है। बिहार में बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

