JMM राज्यसभा की दोनों सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार,हेमंत सोरेन के साथ बैठक के बाद मंत्री ने दिया बयान

JMM राज्यसभा की दोनों सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार,हेमंत सोरेन के साथ बैठक के बाद मंत्री ने दिया बयान

रांचीः झारखंड की दो सीटों पर होने वाला विधानसभा चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस पार्टी के द्वारा प्रणव झा को उम्मीदवार बनाये जाने के अगले ही दिन मुख्यमंत्री और जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की गई।
इस बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार में मंत्री और जेएमएम के दो नेताओं ने मीडिया के सामने जो बयान दिया वो बता रहा है कि अब राज्य में होने वाले राज्यसभा चुनाव गठबंधन के लिए मुश्किलें लेकर आया है। मंत्री हफीजुल हसन और योगेंद्र प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जेएमएम राज्य के दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इससे पहले गुरुवार को सुदिव्य कुमार सोनू ने जेएमएम का स्टेंड साफ करते हुए बताया था कि पार्टी के कार्यकर्ता चाहते है कि जेएमएम दोनों सीटों पर चुनाव लड़े। जेएमएम ने हमेशा गठबंधन धर्म को निभाया है, जब आरजेडी के सिर्फ पांच विधायक थे उस समय प्रेमचंद्र गुप्ता को झारखंड से राज्यसभा भेजने में जेएमएम ने अपना समर्थन दिया था।
कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन में गांठ
कांग्रेस और जेएमएम गठबंधन में गांठ बिहार विधानसभा चुनाव के समय साफ तौर पर देखने को मिला था जब जेएमएम को दरकिनार कर आरजेडी और कांग्रेस ने एक भी सीट हेमंत सोरेन की पार्टी को नहीं दिया। इसके बाद मीडिया के सामने आकर सुप्रियो भट्टाचार्य और सुदिव्य सोनू ने कांग्रेस और आरजेडी पर राजनीतिक धोखेबाजी का आरोप लगाया था। इसके बाद असम में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चाहने के बावजूद जेएमएम अकेले चुनाव लड़ी और कांग्रेस की हार में एक बड़ा फैक्टर बनकर आई।
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस और जेएमएम के बीच सब कुछ इसी दौरान बिगड़ा है। इससे पहले देखे तो कांग्रेस ने जेएमएम के साथ गठबंधन बनाये रखने के लिए अपनी ओर से कई कुर्बानियां पूर्व में दी है, लेकिन इस बार जेएमएम से पहले कांग्रेस का उम्मीदवार का एलान करना झारखंड मुक्ति मोर्चा को चुभ गया और उसने दो सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।
कांग्रेस ने पूर्व में दी हैं कई कुर्बानियां
कांग्रेस के धीरज साहू का जब राज्यसभा कार्यकाल खत्म हुआ, उस समय कल्पना सोरेन को विधानसभा का चुनाव लड़ाना था। कल्पना के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित सीट के रूप में गांडेय को चुना गया। उस सीट से विधायक सरफराज अहमद ने विधायिकी से इस्तीफा दिया और उन्हें धीरज साहू की खाली हुई सीट पर एडजस्ट किया गया और सरफराज अहमद जेएमएम से राज्यसभा सांसद बने। इसके बाद जब 2024 को लोकसभा चुनाव आया तो चाईबासा की सीटिंग सीट कांग्रेस ने जेएमएम के लिए छोड़ दी। गीता कोड़ा के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस ने अपनी दावेदारी छोड़ी और जेएमएम की जोबा मांझी उम्मीदवार बनी, चुनाव जीतकर वो लोकसभा पहुंची। उसी चुनाव में जब लोहरदगा से कांग्रेस पार्टी की ओर से सुखदेव भगत उम्मीद बने तो उनके खिलाफ जेएमएम विधायक चमरा लिंडा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए। हालांकि उस चुनाव में सुखदेव भगत की बड़े वोटों के अंतर से जीत हुई। बाद में जब 2025 विधानसभा चुनाव में चमरा लिंडा विधायक चुनकर आये तो उन्हें हेमंत सोरेन ने मंत्री बनाया। अब एक बार फिर से गठबंधन की अग्निपरीक्षा का समय आया है तब कांग्रेस ने एक कदम आगे बढ़कर अपने उम्मीदवार का एलान किया तो उसके अगले ही दिन जेएमएम ने दो सीटों के लिए दो उम्मीदवार देने का एलान कर दिया। राज्यसभा चुनाव का असर गठबंधन और सरकार पर क्या पड़ेगा वो आने वाले वक्त में पता चलेगा।

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