पटनाः प्रखंड के रामनगर दियारा गणपत राय टोला प्राथमिक विद्यालय और नया प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलाया गया। एमडीएम कार्यक्रम के तहत बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। दवा खाने के कुछ ही देर बाद कई बच्चों को चक्कर और उल्टी की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते कुल 38 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। स्कूल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया।
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शिक्षकों ने दिखाई तत्परता, अस्पताल पहुंचाए गए बच्चे
बच्चों की हालत बिगड़ते देख शिक्षकों ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों की मदद से बच्चों को अथमलगोला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।पीएचसी में सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने स्थिति पर नजर रखी।उन्होंने बताया कि 28 बच्चों को एक घंटे के भीतर ही घर भेज दिया गया। शेष बच्चों को भी देर शाम तक डिस्चार्ज कर दिया गया।
सात बच्चों को बख्तियारपुर भेजा गया
अथमलगोला पीएचसी में 38 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें मनीषा, चांदनी, शिवानी, साहनी, लखन, राकी, निरंजन, अमन, रौशन, ज्योति, निधि, आरती, आशुतोष, हंसराज, शिवसंत, अंजू और अंगद समेत अन्य शामिल थे।एहतियातन सात बच्चों को बख्तियारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमन कुमार ने बताया कि अधिकतर बच्चों की हालत जल्द स्थिर हो गई।क्विक रिस्पांस टीम ने एंबुलेंस से सभी को अस्पताल पहुंचाया। समय पर उपचार मिलने से स्थिति नियंत्रण में रही।
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स्वास्थ्य विभाग ने बताए कारण
वेक्टर बोर्न नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया कि एल्बेंडाजोल खाली पेट लेने पर दुष्प्रभाव दिख सकते हैं। यदि पेट में कीड़े हों तो उल्टी, सिरदर्द, चक्कर या पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। बच्चों की सहनशक्ति कम होने के कारण असर ज्यादा दिखता है।हालांकि यह गंभीर स्थिति नहीं होती और कुछ समय बाद सुधार हो जाता है। कुछ बच्चों ने दवा लेने से पहले पर्याप्त भोजन नहीं किया था। साथ ही एक-दूसरे को देखकर घबराहट भी बढ़ गई थी।
दहशत में आए ग्रामीण, सभी बच्चे सुरक्षित
अचानक बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दीवा श्री ने बताया कि 26 और 12 बच्चों पर असर देखा गया।स्वास्थ्य विभाग की टीम देर शाम तक अस्पताल में मौजूद रही। सभी बच्चों की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है। अभिभावकों को दवा के संभावित सामान्य दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। प्रशासन ने आश्वस्त किया कि घबराने की जरूरत नहीं है, सभी बच्चे सुरक्षित हैं।




